10 टेंडरों में एक ही कंपनी पर मेहरबानी, बड़ी अनियमितता की आशंका, जांच के आदेश

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जेल में खाद्य तेल और मसालों के टेंडर जारी करने के मामले में अनियमितता की आशंका को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं इस पूरे प्रकरण पर डीजी ने किसी भी प्रकार की जानकारी न होने की बात कही है।

जेल में खाद्य तेल और मसालों के टेंडरों में बड़े खेल का आरोप सामने आया है। चहेती कंपनी को सभी दस टेंडर आवंटित किए जाने से पूरी टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में गंभीर अनियमितता की आशंका जताई गई है, जिसके चलते शासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, कारागार विभाग ने पिछले वर्ष खाद्य पदार्थ, मसाले और तेल से जुड़े नौ टेंडर, जबकि एक टेंडर विद्युत यांत्रिकी का जारी किया था। इस तरह कुल दस टेंडर निकाले गए थे। सभी टेंडरों की टेक्निकल बिड में शिव शक्ति इंटरप्राइजेज, एमजी ऑर्गेनाइजेशन और राजमाता इंफ्राकॉन प्रा. लि. ने क्वालीफाई किया।

हालांकि, फाइनेंशियल बिड के चरण में केवल मेसर्स शिव शक्ति इंटरप्राइजेज ही सफल घोषित की गई। इसके बाद उसी एक कंपनी को सभी दस टेंडर आवंटित कर दिए गए। एक ही कंपनी को लगातार सभी टेंडर मिलने से टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और पूरे मामले को संदेहास्पद माना जा रहा है।

शक्तिशाली निकली ‘शक्ति’

जेल में खाद्य सामग्री आपूर्ति से जुड़े टेंडरों में एक ही कंपनी का दबदबा साफ नजर आया। हल्दी आपूर्ति के टेंडर की टेक्निकल बिड में जहां 11 कंपनियां शामिल थीं, वहीं कालीमिर्च आपूर्ति में 12, बड़ी इलायची और लाल मिर्च के टेंडरों में 13-13, जबकि सरसों के तेल की आपूर्ति के टेंडर में 15 कंपनियों ने हिस्सा लिया था।

हालांकि, प्रत्येक टेंडर की टेक्निकल बिड में केवल मेसर्स शिव शक्ति इंटरप्राइजेज, एमजी ऑर्गेनाइजेशन और राजमाता इंफ्राकॉन प्रा. लि. को ही क्वालीफाई किया गया। इसके बाद फाइनेंशियल बिड के चरण में अंततः शिव शक्ति इंटरप्राइजेज को सभी टेंडर आवंटित कर दिए गए।

चौंकाने वाली बात यह है कि इसी तरह का पैटर्न अन्य पांच टेंडरों में भी सामने आया, जबकि शेष सभी कंपनियों को किसी न किसी आधार पर डिसक्वालीफाई कर दिया गया। एक ही कंपनी को बार-बार लाभ मिलने से पूरी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

30 मिनट बाद खुल गए टेंडर

टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक और गंभीर सवाल सामने आया है। टेंडर में आवेदन करने की अंतिम समयसीमा 23 अक्तूबर 2025 की रात 8 बजे निर्धारित थी, लेकिन इसके महज आधे घंटे बाद ही, रात 8:30 बजे, सभी टेंडर खोल दिए गए।

आमतौर पर टेंडर प्रक्रिया में समयांतराल रखा जाता है, ताकि तकनीकी जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। ऐसे में इतनी कम अवधि में टेंडर खोल दिए जाने को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दी टेंडर खोलने की क्या मजबूरी थी और क्या सभी नियमों का पालन किया गया।

इस पहलू ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर और अधिक प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, जिस पर जांच के दौरान विशेष ध्यान दिए जाने की मांग उठ रही है।

सवालों के घेरे में ये टेंडर

जिन दस टेंडरों को लेकर अनियमितता की आशंका जताई जा रही है, उनमें निम्नलिखित बिड नंबर शामिल हैं—
GEM/2025/B/682/313,
GEM/2025/B/6777913,
GEM/2025/B/6777238,
GEM/2025/B/6777801,
GEM/2025/B/6777391,
GEM/2025/B/6777462,
GEM/2025/B/6777536,
GEM/2025/B/6777627,
GEM/2025/B/6777738,
GEM/2025/B/6777858

इन सभी टेंडरों में एक ही कंपनी को लाभ पहुंचाए जाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव के आरोप लगे हैं। शासन द्वारा आदेशित जांच में इन सभी बिड्स को विशेष रूप से परखा जाएगा।

डीजी बोले… जानकारी नहीं

जेल में खाद्य तेल और मसालों की आपूर्ति से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक विधायक ने शासन को लिखित शिकायत की थी, जिसमें भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। शासन ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

इसके तहत संयुक्त सचिव सूर्य प्रकाश मिश्रा ने 16 दिसंबर 2025 को डीजी, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शासन को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया है।

हालांकि, इस संबंध में डीजी जेल पीसी मीणा का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी भी मामले की कोई जानकारी नहीं है

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