शनिवार को घर लाईं ये 7 चीजें तो नाराज हो सकते हैं शनिदेव! जानिए किन खरीददारी से बचना चाहिए और क्यों
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता माने जाने वाले शनिदेव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्म और गतिविधियों का सीधा प्रभाव जीवन पर पड़ता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को कुछ वस्तुओं की खरीददारी या उन्हें घर लाना अशुभ माना जाता है, जिससे जीवन में बाधाएं और परेशानियां बढ़ सकती हैं।
शनिवार को तेल खरीदना माना जाता है वर्जित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन विशेषकर सरसों या तिल का तेल खरीदने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन तेल खरीदने से स्वास्थ्य और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसके बजाय शनि मंदिर में तेल का दान या दीपक जलाना अधिक शुभ माना जाता है।
नमक खरीदने से भी बन सकती हैं परेशानियां
कई परंपराओं में शनिवार को नमक खरीदने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन नमक घर लाने से आर्थिक अस्थिरता या कर्ज बढ़ने जैसी स्थिति बन सकती है। हालांकि यह पूरी तरह परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है।
लोहे के सामान से जुड़ी है शनि की ऊर्जा
ज्योतिष शास्त्र में लोहा शनिदेव से जुड़ा हुआ धातु माना जाता है। इसलिए शनिवार को लोहे से बनी वस्तुएं खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे जीवन में बाधाएं और देरी बढ़ सकती हैं।
काले कपड़े खरीदने से भी बचने की सलाह
कई धार्मिक परंपराओं में शनिवार को काले रंग के कपड़े खरीदने या पहनने से परहेज किया जाता है। इसे नकारात्मकता और दुख से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इस दिन इसे अशुभ माना जाता है।
झाड़ू घर लाना भी माना जाता है अशुभ
शनिवार को झाड़ू खरीदना या घर लाना भी वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में आर्थिक परेशानियां और दरिद्रता बढ़ सकती है। इसलिए इस दिन झाड़ू खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
जूते खरीदने को लेकर भी है परंपरागत मान्यता
शनिवार को नए जूते खरीदना भी कई परंपराओं में अशुभ माना जाता है। खासकर काले रंग के जूते घर लाने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे जीवन में रुकावटें आ सकती हैं।
काले तिल की खरीद से भी जुड़ी है सावधानी
हालांकि काले तिल का उपयोग शनिदेव की पूजा में किया जाता है, लेकिन शनिवार के दिन इसे खरीदने से भी बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि पूजा सामग्री पहले दिन खरीद लेना अधिक उचित होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये सभी परंपराएं आस्था और विश्वास पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य जीवन में अनुशासन और संयम बनाए रखना माना जाता है।
