IIT खड़गपुर खोलेगा देश का पहला फिजिकल AI स्कूल, 35 करोड़ रुपये होंगे खर्च; जानें कब शुरू होंगे कोर्स और कौन ले सकेगा दाखिला
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भारत को नई दिशा देने के लिए आईआईटी खड़गपुर एक विशेष स्कूल स्थापित करने जा रहा है। इस पहल पर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रस्तावित संस्थान का नाम बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल AI रखा गया है। इसके लिए आईआईटी खड़गपुर ने अपने पूर्व छात्र विनोद गुप्ता और आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस स्कूल का मुख्य फोकस फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर होगा। इसका उद्देश्य AI को केवल डिजिटल एप्लिकेशन और डेटा आधारित एल्गोरिदम तक सीमित रखने के बजाय ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो वास्तविक दुनिया को समझ सके, परिस्थितियों का अनुमान लगा सके और भौतिक वातावरण के साथ संवाद कर सके।
क्या है फिजिकल AI और क्यों है खास?
फिजिकल AI में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को वास्तविक दुनिया की परिस्थितियों, इंजीनियरिंग, विज्ञान, चिकित्सा और जैविक प्रणालियों से जोड़कर विकसित किया जाता है। इस क्षेत्र में ऐसी तकनीकों पर काम होता है, जो वास्तविक वातावरण से जानकारी लेकर उसके अनुसार निर्णय कर सकें और काम कर सकें।
आईआईटी खड़गपुर के प्रस्तावित स्कूल में इसी तरह की तकनीकों पर शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए आधुनिक AI तकनीकों का उपयोग करना है।
35 करोड़ रुपये की लागत, कहां से आएगी फंडिंग?
इस परियोजना के लिए कुल 35 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र विनोद गुप्ता का परिवार 12.5 करोड़ रुपये देगा, जबकि एक अन्य अज्ञात पूर्व छात्र की ओर से 10 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। शेष राशि संस्थान की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी।
इस फंडिंग का इस्तेमाल AI विभाग के लिए समर्पित बुनियादी ढांचा विकसित करने और संबंधित शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।
दिवंगत बेटे के नाम पर रखा जाएगा स्कूल
इस संस्थान का नाम विनोद गुप्ता के दिवंगत बेटे बेंजामिन गुप्ता की स्मृति में रखा गया है। उनका निधन 28 वर्ष की उम्र में हुआ था। बेंजामिन जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में संयुक्त JD/MBA कार्यक्रम की पढ़ाई कर रहे थे। वे अमेरिकी प्रतिनिधि रहम इमैनुएल और अमेरिकी विदेश विभाग से भी जुड़े रहे थे।
आईआईटी खड़गपुर के लाइफ फेलो विनोद गुप्ता ने इस पहल को अपने लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, इस संस्थान के माध्यम से उनके बेटे की स्मृति को सम्मान दिया जाएगा।
अगले अकादमिक सत्र से शुरू हो सकते हैं कोर्स
संस्थान की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद नए अकादमिक सत्र से यहां शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू होने की उम्मीद है। प्रस्तावित कार्यक्रमों में कई तरह के कोर्स शामिल किए जा सकते हैं।
- हाइब्रिड मास्टर डिग्री कार्यक्रम
- एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम
- प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन कोर्स
- अलग-अलग विषयों को जोड़ने वाले विशेष मॉड्यूल
इन कार्यक्रमों के जरिए छात्रों, शोधार्थियों, कामकाजी पेशेवरों, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और मेडिकल ग्रेजुएट्स को आधुनिक AI तकनीकों से जोड़ने की योजना है।
कौन ले सकेगा दाखिला?
प्रस्तावित कार्यक्रमों से विभिन्न शैक्षणिक और पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने की योजना है। इनमें इंजीनियरिंग और विज्ञान के विद्यार्थी, शोधकर्ता, कामकाजी पेशेवर तथा मेडिकल ग्रेजुएट्स शामिल हैं। हालांकि, दाखिले की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, सीटों की संख्या और प्रत्येक कोर्स की शर्तों का विस्तृत विवरण अभी उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। इनका निर्धारण संबंधित कार्यक्रमों की आधिकारिक घोषणा और मंजूरियों के बाद स्पष्ट होगा।
फिजिकल AI में इन क्षेत्रों पर होगा शोध
आईआईटी खड़गपुर के नए स्कूल में कई उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर काम करने की योजना है। इनमें फिजिक्स आधारित मशीन लर्निंग, साइंटिफिक AI, डिजिटल ट्विन, इंटेलिजेंट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, एडवांस्ड सेंसिंग, कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग और AI आधारित प्रयोग शामिल हैं।
इन तकनीकों का इस्तेमाल आधुनिक विनिर्माण, ऊर्जा, जलवायु एवं पर्यावरण तकनीक, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा उपकरणों, बुनियादी ढांचे और अगली पीढ़ी की इंजीनियरिंग प्रणालियों में किया जा सकता है। इस पहल के जरिए संस्थान का लक्ष्य AI शोध को वास्तविक दुनिया की जरूरतों और औद्योगिक समस्याओं से जोड़ना है।
