गिरफ्तारी की वजह लिखित में बताना अब होगा अनिवार्य, डीजीपी का सख्त आदेश; नियम तोड़ने पर कोर्ट घोषित कर सकती है गिरफ्तारी अवैध
उत्तर प्रदेश में गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर पुलिस महकमे के लिए बड़ा निर्देश जारी किया गया है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि किसी भी आरोपी या गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप से अनिवार्य तौर पर बताया जाए। साथ ही यह जानकारी ऐसी भाषा में दी जाए, जिसे संबंधित व्यक्ति आसानी से समझ सके।
डीजीपी मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि यदि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं दी जाती है, तो अदालत गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए बंदी को रिहा करने का आदेश दे सकती है। इसे लेकर सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को बिना किसी अपवाद के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
गिरफ्तारी मेमो में कोई कॉलम खाली नहीं छोड़ने के निर्देश
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि गिरफ्तारी मेमो के प्रारूप में सभी जरूरी सूचनाएं पूरी तरह भरी जाएं और कोई भी कॉलम रिक्त न छोड़ा जाए। डीजीपी ने जिलों में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है, जिनमें राज्य सरकार को गिरफ्तारी के आधार बताने से जुड़े संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई थी नाराजगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौ दिसंबर 2025 और तीन मार्च 2026 को निस्तारित दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं में यूपी पुलिस को हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को गिरफ्तारी के आधार न बताने का दोषी माना था।
एक मामले में अदालत ने पाया था कि याचिकाकर्ता को 27 जनवरी 2026 को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया और तीन महीने से अधिक समय तक बिना गिरफ्तारी का कारण बताए जेल में रखा गया। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया था।
वहीं दूसरे मामले में 29 अप्रैल को दिए गए फैसले में अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता तीन महीने से अधिक समय तक अवैध गिरफ्तारी और हिरासत में रहा।
राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश
हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपये का अनुकरणीय जुर्माना देने का आदेश भी दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि शुरुआती भुगतान राज्य सरकार करेगी, लेकिन बाद में यह राशि अवैध गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जाएगी।
डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर में अपर महाधिवक्ता के उस पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें फील्ड स्तर पर कई मामलों में नियमों के व्यवस्थित उल्लंघन और गिरफ्तारी संबंधी प्रक्रियाओं का पालन न किए जाने पर चिंता जताई गई थी।
