Monsoon Health Alert: बारिश में तेजी से बढ़ता है मलेरिया का खतरा, जानिए इसके 5 प्रकार, लक्षण और बचाव के आसान उपाय
नई दिल्ली: मानसून के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही मलेरिया का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मलेरिया केवल एक प्रकार का नहीं बल्कि प्लाज्मोडियम परजीवी की पांच अलग-अलग प्रजातियों के कारण होता है।
क्या है मलेरिया और कैसे फैलता है?
मलेरिया एक परजीवी जनित रोग है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर के माध्यम से प्लाज्मोडियम परजीवी शरीर में प्रवेश करता है और सबसे पहले लीवर को संक्रमित करता है। इसके बाद यह रक्त कोशिकाओं में तेजी से फैलने लगता है, जिससे मरीज को तेज बुखार और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
मलेरिया के प्रमुख लक्षण
मलेरिया होने पर मरीज में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं—
- तेज ठंड लगना और कंपकंपी
- तेज बुखार
- अत्यधिक पसीना आना
- सिरदर्द
- उल्टी
- दस्त
- शरीर और जोड़ों में दर्द
- कमजोरी और भूख कम लगना
जानिए मलेरिया के 5 प्रकार
1. प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum)
यह मलेरिया का सबसे गंभीर प्रकार माना जाता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, अत्यधिक ठंड लगना, लगातार उल्टियां और बेहोशी जैसी स्थिति हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
2. प्लाज्मोडियम विवैक्स (Plasmodium vivax)
यह सबसे अधिक पाया जाने वाला मलेरिया है। इसमें हर 48 घंटे के अंतराल पर बुखार आने की प्रवृत्ति होती है। मरीज को कमर दर्द, सिरदर्द, हाथ-पैरों में दर्द, भूख न लगना और तेज बुखार की शिकायत रहती है।
3. प्लाज्मोडियम ओवेल (Plasmodium ovale)
यह अपेक्षाकृत कम पाया जाने वाला प्रकार है। इसमें भी अंतराल के साथ बुखार आता है और इसके लक्षण विवैक्स मलेरिया से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
4. प्लाज्मोडियम मलेरिए (Plasmodium malariae)
इस प्रकार में मरीज को लगभग हर चौथे दिन बुखार आता है। कुछ मामलों में पेशाब के जरिए प्रोटीन की कमी होने लगती है, जिससे शरीर में सूजन जैसी समस्या भी हो सकती है।
5. प्लाज्मोडियम नोलेसी (Plasmodium knowlesi)
यह परजीवी मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है। इसके संक्रमण में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मलेरिया से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
बारिश के मौसम में घर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। नालियों की नियमित सफाई कराएं और गड्ढों में पानी जमा होने से रोकें। समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराएं। मच्छरों से बचाव के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और आवश्यकता पड़ने पर मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले उपायों का इस्तेमाल करें।
