यूपी में फिर छिड़ी पोस्टर वॉर, कई शहरों में लगे अखिलेश विरोधी होर्डिंग, 12 साल पुराने बदायूं कांड का जिक्र
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पोस्टर वॉर ने माहौल गरमा दिया है। इस बार निशाने पर समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं। प्रदेश के कई शहरों में ऐसे पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं, जिनमें 12 साल पुराने बदायूं डबल रेप और मर्डर केस का जिक्र करते हुए सपा पर हमला बोला गया है। पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, जबकि सपा कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
इन पोस्टरों को बदायूं, नोएडा, गाजियाबाद, हरदोई, कानपुर, शाहजहांपुर, कन्नौज, उन्नाव और कानपुर देहात समेत कई जिलों में लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टरों में अखिलेश यादव को सफेद टोपी पहने दिखाया गया है और समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
12 साल पुराने बदायूं कांड को बनाया मुद्दा
प्रदेश भर में लगाए गए इन होर्डिंग्स में साल 2014 के चर्चित बदायूं डबल रेप और हत्या मामले का उल्लेख किया गया है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। घटना के बाद पूरे देश में भारी आक्रोश देखने को मिला था। पोस्टरों में इसी घटना को आधार बनाकर सपा सरकार पर निशाना साधा गया है।
जानकारी के मुताबिक, घटना के आरोपी यादव समाज से थे, जबकि पीड़ित लड़कियां शाक्य समाज की थीं। अब घटना के 12 साल बाद एक बार फिर यह मामला पोस्टरों के जरिए राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
अखिलेश के साथ आजम खान की तस्वीर भी लगाई गई
कन्नौज समेत कई जिलों में लगाए गए बोर्ड और पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ आजम खान की तस्वीर भी दिखाई गई है। कुछ पोस्टरों में समाजवादी पार्टी को महिला विरोधी बताते हुए तीखे संदेश लिखे गए हैं। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि ये पोस्टर और होर्डिंग किस संगठन या व्यक्ति ने लगवाए हैं।
अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों को लेकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह सपा की छवि खराब करने की साजिश है।
पोस्टर हटाने में जुटे सपा कार्यकर्ता
प्रदेश के कई जिलों में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ऐसे पोस्टरों को हटाना शुरू कर दिया है। पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावी माहौल के बीच पोस्टर वॉर अब और तेज हो सकती है। वहीं सपा कार्यकर्ताओं में इस मुद्दे को लेकर लगातार आक्रोश देखने को मिल रहा है।
