अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारियां तेज, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए 63 अधिकारियों की तैनाती

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जम्मू: अमरनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियों की रफ्तार बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने यात्रा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपदा राहत कार्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से 63 अधिकारियों की तैनाती को मंजूरी दी है। ये अधिकारी यात्रा मार्ग पर स्थापित विभिन्न शिविरों में शिविर निदेशक और अतिरिक्त शिविर निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

अधिकारियों की तैनाती के जरिए यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इससे यात्रा संचालन को और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

3 जुलाई से शुरू होगी 57 दिनों की पवित्र यात्रा

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

यात्रा शिविरों में संभालेंगे अहम जिम्मेदारियां

तैनात किए गए अधिकारियों में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें यात्रा मार्ग के अलग-अलग शिविरों में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें प्रशासन, पर्यटन, जल शक्ति, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, राजस्व और ग्रामीण विकास विभागों के अधिकारी शामिल हैं। इनकी भूमिका यात्रा के दौरान समन्वय, सुरक्षा प्रबंधन, राहत कार्य और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की निगरानी करना होगी।

श्राइन बोर्ड तय करेगा तैनाती का अंतिम खाका

सरकारी आदेश के अनुसार संबंधित विभाग अपने अधिकारियों को कार्यमुक्त करेंगे, ताकि वे निर्धारित तिथि पर श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय में रिपोर्ट कर सकें। अधिकारियों की अंतिम तैनाती और शिविरों का आवंटन श्राइन बोर्ड द्वारा किया जाएगा।

यात्रा समाप्त होने के बाद लौटेंगे मूल पदों पर

प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए अधिकारी यात्रा अवधि के दौरान अपने मूल विभागों से ही वेतन प्राप्त करते रहेंगे। यात्रा संपन्न होने के बाद सभी अधिकारी अपने-अपने मूल पदों पर वापस लौट जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है।

 

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