PoK में बेकाबू हुआ जनआंदोलन! चुनाव से पहले इंटरनेट बंद, JAAC पर बैन, जगह-जगह भारी फोर्स तैनात
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। 27 जुलाई को प्रस्तावित चुनाव से पहले पूरे क्षेत्र में जारी जनआंदोलन अब आर्थिक मांगों से आगे बढ़कर राजनीतिक अधिकारों और स्वशासन की लड़ाई का रूप ले चुका है। इस बीच पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन चला रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगा दिया है, इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और कई इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इसके विरोध में आंदोलनकारियों ने 27 जुलाई के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ आंदोलन, अब राजनीतिक अधिकारों की मांग
यह आंदोलन वर्ष 2023 में बिजली के बढ़े हुए बिल, आटे की कीमतों और अन्य आर्थिक समस्याओं के विरोध से शुरू हुआ था। समय के साथ आंदोलन ने व्यापक स्वरूप ले लिया और प्रदर्शनकारियों ने 38 सूत्रीय मांगपत्र तैयार किया।
आंदोलन की प्रमुख मांगों में पीओके विधानसभा में पाकिस्तान की ओर से निर्धारित 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को समाप्त करना शामिल है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। हालांकि अक्टूबर 2025 में सरकार और जेएएसी के बीच समझौता हुआ था, लेकिन समिति का आरोप है कि सरकार ने उस समझौते को लागू नहीं किया।
लॉन्ग मार्च के बाद बढ़ा टकराव
जून में जब आंदोलनकारियों ने मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च शुरू किया, तब हालात और तनावपूर्ण हो गए। इसी दौरान 6 और 7 जून की रात जेएएसी के प्रमुख नेता उमर नजीर कश्मीरी पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनके सहयोगी शाहजैब हबीब की मौत हो गई।
इसके बाद 5 जून को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने आतंकवाद निरोधी कानून के तहत जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया।
इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू, अतिरिक्त जवान तैनात
प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं। साथ ही सिंध रेंजर्स और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी के लगभग 14 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है।
इन प्रतिबंधों के बावजूद भीम्बर, मीरपुर और कोटली सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर पहुंचे। समिति का दावा है कि 9 जून से अब तक पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 56 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं या लापता हैं। हालांकि इंटरनेट बंद होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आंदोलनकारियों ने भारत की ओर वैकल्पिक संपर्क का दिया संकेत
पुंछ और रावलकोट क्षेत्रों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के धरने लगातार जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिविरों में राशन और दवाइयों की कमी लगातार बढ़ रही है।
जेएएसी के नेता सरदार अमन ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान सरकार आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकती रही और कार्रवाई जारी रही, तो आंदोलन को जारी रखने के लिए भारत के जम्मू-कश्मीर की ओर वैकल्पिक संपर्क और आपूर्ति मार्ग खोलने पर विचार करना पड़ सकता है।
विदेशों में भी पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विदेशों में रह रहे कश्मीरी प्रवासियों ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। लंदन में संसद स्क्वायर से लेकर पाकिस्तानी उच्चायोग तक लॉन्ग मार्च निकाला गया, जिसमें बलोच, पश्तून और सिंधी समुदाय के लोग भी शामिल हुए।
बताया गया है कि ब्रिटेन के 60 से अधिक सांसदों ने भी इस मामले को लेकर पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखकर स्थिति पर चिंता जताई है।
क्षेत्रीय अस्थिरता पर बढ़ी चिंता
बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के बाद अब पीओके में बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा हालात को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जारी विरोध प्रदर्शन और सरकारी कार्रवाई के चलते पूरे क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
