राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान: 3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन और ₹50 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य तय समय से पहले होगा हासिल

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नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और देश अगले 2-3 वर्षों के लिए निर्धारित 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन तथा 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को तय समय से पहले हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती क्षमता और आत्मविश्वास का प्रमाण है।

नागपुर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ यंत्र इंडिया लिमिटेड की आयुध निर्माणी अंबाझरी इकाई में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस के भूमि पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश अब महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है।

आयुध निर्माणी बोर्ड के उत्पादन में दोगुने से ज्यादा वृद्धि

राजनाथ सिंह ने बताया कि आयुध निर्माणी बोर्ड के निगमीकरण के बाद उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2019-20 में जहां उत्पादन 12,755 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये हो गया।

उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करने में सक्षम होता है, वही अपने हितों की सुरक्षा सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ कर सकता है।

एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस बनेगा रणनीतिक ताकत का केंद्र

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित एक्सट्रूज़न प्रेस देश की सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक होगी। इसके माध्यम से रक्षा प्रणालियों, अंतरिक्ष एवं विमानन संरचनाओं, मिसाइल कार्यक्रमों, रेलवे, परिवहन और अन्य रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बड़े और जटिल एल्यूमिनियम मिश्रधातु प्रोफाइल तैयार किए जा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना महत्वपूर्ण एल्यूमिनियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करेगी, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाएगी और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों को स्वदेशी स्तर पर पूरा करने में मदद करेगी।

आधुनिक युद्धों में मजबूत धातुओं की बढ़ी अहमियत

राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम ऐसी धातुओं की मांग करते हैं जो हल्की होने के साथ-साथ अत्यधिक मजबूत भी हों। उन्होंने कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाली धातुएं कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी प्रदर्शन सुनिश्चित करती हैं और नई एक्सट्रूज़न प्रेस इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में निर्मित उपकरणों ने उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने स्वदेशी हार्डवेयर निर्माण को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी सैन्य प्रणालियों की वास्तविक ताकत हजारों महत्वपूर्ण अवयवों से मिलकर बनती है और यह नई सुविधा देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

युद्ध का स्वरूप बदल रहा, लेकिन पारंपरिक सैन्य क्षमता अब भी जरूरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है और शत्रुओं की पहचान करना पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। इसके बावजूद पारंपरिक युद्ध और उससे जुड़े संसाधनों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है और आने वाले दशकों में भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि मजबूत सैन्य-औद्योगिक आधार किसी भी देश की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

2014 के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा उत्पादन

रक्षा मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन को साकार करने के लिए प्रौद्योगिकी, कार्यबल, ज्ञान और राष्ट्र के प्रति विश्वास जैसे चार प्रमुख स्तंभों पर एक साथ काम कर रही है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2014 में 46 हजार करोड़ रुपये का घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जबकि अब यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।

यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका की सराहना

राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में यंत्र इंडिया लिमिटेड के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण रक्षा उत्पादन प्रणाली को अधिक सक्षम, चुस्त और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से किया गया था और यंत्र इंडिया लिमिटेड उसी परिवर्तन का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि निगमीकरण के बाद नई इकाइयों को अधिक परिचालन स्वतंत्रता, नवाचार, अनुसंधान, जोखिम लेने और निर्यात बढ़ाने के अवसर मिले हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

अनुसंधान और पूंजी निवेश को बताया सफलता की कुंजी

रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में अनुसंधान एवं विकास तथा पूंजी निवेश किसी भी औद्योगिक इकाई की प्रगति के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि जो संस्थान नवाचार को अपनाते हैं, वही भविष्य का नेतृत्व करते हैं।

उन्होंने आधुनिक मशीनरी और उन्नत तकनीकों में निवेश को उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।

फडणवीस बोले- रक्षा क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा भारत

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस की स्थापना आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के कारण भारत रक्षा क्षेत्र में वैश्विक बाजार में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और दुनिया भारतीय रक्षा उद्योग की प्रगति को स्वीकार कर रही है।

इस अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव गरिमा भगत, यंत्र इंडिया लिमिटेड के संचालन निदेशक एवं अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) विजयकुमार अय्यर सहित रक्षा उत्पादन विभाग, यंत्र इंडिया लिमिटेड, रक्षा बलों और उद्योग जगत के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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