ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में धमाका! निफ्टी 24,000 के करीब, सेंसेक्स ने लगाई 1200 अंकों की छलांग

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नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ती सकारात्मक संकेतों के बीच सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली और निफ्टी 24 हजार के करीब पहुंच गया।

कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 करीब डेढ़ प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ 23,984 के स्तर पर खुला, जबकि सेंसेक्स लगभग 1,200 अंकों की तेजी के साथ 76,725 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

ईरान-अमेरिका वार्ता से बढ़ा बाजार का भरोसा

बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को माना जा रहा है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच एक प्रारूप समझौते पर सहमति बनने की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को राहत दी है। माना जा रहा है कि इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से सुचारु बनाना है।

समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता को कम किया है, जिससे दुनिया भर के शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। इसी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

निफ्टी में चौतरफा खरीदारी, अधिकांश शेयर हरे निशान में

बाजार की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निफ्टी 50 के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। केवल कुछ चुनिंदा शेयरों में ही दबाव देखने को मिला, जबकि व्यापक बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा।

वित्तीय, ऑटोमोबाइल और विमानन क्षेत्र से जुड़े शेयरों में निवेशकों ने विशेष रुचि दिखाई। वहीं कुछ दवा और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

संभावित समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंकाएं कम हुई हैं, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग चार प्रतिशत टूटकर 83.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल करीब 4.7 प्रतिशत फिसलकर 80.90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, व्यापार घाटे में राहत मिल सकती है और कॉरपोरेट कंपनियों की लागत घटने से बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की निगाहें ईरान-अमेरिका वार्ता की दिशा, कच्चे तेल की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेंगी। यदि समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति जारी रहती है तो भारतीय बाजार में तेजी का माहौल और मजबूत हो सकता है।

 

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