राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार बनेगा सीईओ का पद, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर; प्रबंधन में होंगे बड़े बदलाव

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अयोध्या: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद सृजित करने की घोषणा की है। इसके साथ ही महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं।

सीईओ के चयन के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति

सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में सीईओ के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल हैं। यह समिति उपयुक्त उम्मीदवारों के नाम ट्रस्ट को सौंपेगी।

कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव

ट्रस्ट ने वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। ट्रस्ट के गठन के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक फेरबदल माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच लिया गया फैसला

ट्रस्ट का कहना है कि राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर परिसर के विस्तृत संचालन को देखते हुए पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई। नए सीईओ पर मंदिर के दैनिक संचालन, प्रशासन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी होगी।

दान विवाद के बाद हुई पहली अहम बैठक

राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी के मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट की यह पहली बैठक थी। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने 25 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

22 जुलाई को होगी अगली बैठक

ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। तब तक विशेष जांच दल से अंतिम रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इसी बैठक में ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर भी फैसला लिया जाएगा।

दान और खर्च का पूरा हिसाब किया सार्वजनिक

ट्रस्ट ने बैठक के दौरान मंदिर में प्राप्त दान और उसके उपयोग का विवरण भी साझा किया। ट्रस्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला, जिसमें से 319 करोड़ रुपये मंदिर संचालन और व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए। शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित रखी गई है।

ट्रस्ट ने यह भी बताया कि गठन के बाद से ‘निधि समर्पण अभियान’ और अन्य माध्यमों से कुल 3,246 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। इनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और उससे जुड़े पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।

‘चोरी छोटी या बड़ी नहीं, विश्वास को पहुंचा आघात सबसे बड़ा’

बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दानपेटी से चोरी की घटना बेहद दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की सबसे बड़ी चिंता चोरी की रकम नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और ट्रस्ट की साख को पहुंचे नुकसान की है।

उन्होंने कहा कि चोरी किसी भी स्तर की हो, उसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही कुछ लोगों पर इस मामले का इस्तेमाल राम मंदिर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।

कृष्ण मोहन बोले- व्यवस्था की कमियां दूर करना पहली प्राथमिकता

अंतरिम महासचिव का पद संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था में कुछ कमियां थीं, जिनकी वजह से कथित गड़बड़ियां संभव हुईं। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता सभी खामियों को दूर कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना होगी।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा मजबूत करने के लिए पारदर्शिता बढ़ाएगा और यह भी स्पष्ट करेगा कि मंदिर में मिलने वाले दान का उपयोग किस प्रकार किया जाता है।

कौन हैं कृष्ण मोहन?

74 वर्षीय कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले हैं। वह महाराष्ट्र कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे हैं और अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी कई महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं।

 

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