लखनऊ के नवाब की पहल से शुरू हुई बड़ा मंगल की परंपरा, 200 साल बाद भी भंडारों के जरिए कायम है आस्था और सेवा की मिसाल
लखनऊ: ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को ‘बड़ा मंगल’ के रूप में मनाने की परंपरा उत्तर भारत, खासकर लखनऊ में, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। हनुमान जी को समर्पित यह दिन सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि सेवा और भाईचारे की मिसाल भी पेश करता है। इस परंपरा की शुरुआत करीब 200 साल पहले अवध के नवाब मोहम्मद वाजिद अली शाह से जुड़ी बताई जाती है, जो आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व और मान्यता
ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी माह में भगवान राम और हनुमान जी का प्रथम मिलन हुआ था। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इसी समय हनुमान जी को अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ था। इसी कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धा है कि इस दिन की गई भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवाब के समय से शुरू हुई भंडारे की परंपरा
इस परंपरा से जुड़ी ऐतिहासिक कथा अवध के नवाब मोहम्मद वाजिद अली शाह से संबंधित मानी जाती है। लगभग 200 साल पहले उनके पुत्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई थी। कई वैद्यों और हकीमों के प्रयासों के बावजूद सुधार नहीं हुआ। इसी दौरान किसी ने नवाब की बेगम को लखनऊ के अलीगंज स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में प्रार्थना करने की सलाह दी। बेगम ने मंगलवार के दिन मंदिर में जाकर पुत्र के स्वास्थ्य के लिए मन्नत मांगी। कुछ समय बाद उनके पुत्र के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया। इस घटना को चमत्कार मानते हुए नवाब और उनकी बेगम ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और भंडारे का आयोजन शुरू किया, जिससे बड़ा मंगल पर भंडारे की परंपरा की नींव पड़ी।
लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका बड़ा मंगल
आज बड़ा मंगल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लखनऊ की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। शहर भर में जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं, जहां लोग मिलकर सेवा कार्य करते हैं। सड़क किनारे शरबत, पानी, पूड़ी-सब्जी और प्रसाद का वितरण किया जाता है, जिससे गर्मी के मौसम में लोगों को राहत मिलती है।
गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल
बड़ा मंगल की सबसे खास बात इसकी सामाजिक समरसता है। इस परंपरा में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। नवाब वाजिद अली शाह द्वारा शुरू की गई यह पहल आज भी सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का मजबूत प्रतीक बनी हुई है।
हनुमान भक्ति और सेवा का संगम
बड़ा मंगल के दिन भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, मंदिरों में चोला चढ़ाते हैं और हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंदों को भोजन और जल का दान करना इस दिन का प्रमुख पुण्य कार्य माना जाता है। यह पर्व आस्था, सेवा और एकता का ऐसा संगम है, जो पीढ़ियों से लोगों को जोड़ता आ रहा है।
