8 और 9 अक्टूबर की रात आसमान में होगी ‘रोशनी की बारिश’, बिना टेलीस्कोप दिखेगा अद्भुत नजारा; लखनऊ वाले भूलकर भी न चूकें

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लखनऊ: गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात आसमान में एक खास खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। ड्रैकोनिड उल्कापिंड बारिश अपने चरम पर होगी। मौसम साफ रहने पर आसमान देखने के शौकीन बिना टेलीस्कोप या दूरबीन के ही तेजी से गुजरती चमकदार रोशनी की लकीरें देख सकेंगे।

जलते हुए चट्टानी कणों से बनती है रोशनी

ड्रैकोनिड उल्कापिंड बारिश 6 से 10 अक्टूबर तक सक्रिय रहती है। यह घटना तब होती है जब पृथ्वी धूमकेतु 21P/Giacobini-Zinner से निकली धूल और छोटे चट्टानी कणों के रास्ते से गुजरती है। पृथ्वी के वायुमंडल में तेज गति से दाखिल होने के दौरान ये कण गर्म होकर जलने लगते हैं और चमक पैदा करते हैं। इन्हें आमतौर पर टूटते तारे भी कहा जाता है।

शाम के बाद अंधेरे आसमान में बेहतर दिखेगा नजारा

दूसरी कई उल्कापिंड बारिशों से अलग ड्रैकोनिड को देखने का सबसे अच्छा समय आधी रात के बाद नहीं, बल्कि शाम को अंधेरा होने के बाद का माना जाता है। ये उत्तरी आसमान में ड्रेको यानी ड्रैगन तारामंडल की दिशा से निकलते हुए दिखाई देते हैं। हालांकि उल्कापिंड आसमान के लगभग किसी भी हिस्से में चमक सकते हैं।

कभी-कभी अचानक बढ़ जाती है उल्कापिंडों की गतिविधि

लखनऊ के इंदिरा गांधी तारामंडल के वैज्ञानिक अधिकारी सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि लोगों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि पूरा आसमान टूटते तारों से भर जाएगा। ड्रैकोनिड आमतौर पर सामान्य उल्कापिंड बारिश होती है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि कभी-कभी इसकी गतिविधि अचानक बढ़ सकती है।

उन्होंने बताया कि इसे देखने के लिए अंधेरी और खुली जगह चुनना बेहतर रहेगा। स्ट्रीट लाइट से दूर रहकर कुछ समय तक आंखों को अंधेरे के माहौल के अनुसार ढलने देना चाहिए, जिससे हल्की रोशनी वाली उल्कापिंड लकीरें आसानी से दिखाई दे सकें।

10 अक्टूबर की अमावस्या से मिलेगा फायदा

इस बार ड्रैकोनिड देखने वालों को चांदनी कम होने का अतिरिक्त फायदा मिलेगा। 10 अक्टूबर को अमावस्या है। ऐसे में हल्की चमक वाले उल्कापिंडों के चांद की रोशनी में छिपने की संभावना कम रहेगी। आदर्श परिस्थितियों में प्रति घंटे करीब पांच ड्रैकोनिड दिखाई दे सकते हैं। हालांकि लखनऊ से वास्तविक संख्या प्रकाश प्रदूषण और बादलों की स्थिति पर निर्भर करेगी।

लखनऊ में ऐसे देखें आसमान का अद्भुत नजारा

लखनऊ के लोगों के लिए बेहतर होगा कि वे शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान पर जाएं, जहां आसमान साफ दिखाई देता हो। आराम से लेटकर ऊपर आसमान देखने पर उल्कापिंडों की चमकती लकीरें नजर आ सकती हैं। इसके लिए ड्रेको तारामंडल को ढूंढना जरूरी नहीं है, क्योंकि उल्कापिंड आसमान के किसी भी हिस्से में दिखाई दे सकते हैं।

अंधेरे में आंखों को पूरी तरह अभ्यस्त होने में करीब 20 से 30 मिनट लग सकते हैं। इसलिए कुछ समय तक लगातार आसमान देखने से हल्की रोशनी वाली उल्कापिंड लकीरों को देखने की संभावना बढ़ सकती है।

अक्टूबर में आगे भी दिखेंगे कई खगोलीय नजारे

अक्टूबर में ड्रैकोनिड के अलावा भी आसमान में कई दिलचस्प घटनाएं देखने को मिलेंगी। शनि 4 अक्टूबर को अपोजीशन की स्थिति में पहुंच गया है। इसके बाद छल्लों वाला यह ग्रह रात के ज्यादातर समय दिखाई देगा।

ओरियोनिड्स उल्का वर्षा 21-22 अक्टूबर को अपने चरम पर होगी। यह हैली के धूमकेतु से जुड़ी है और भोर से पहले तथा चांद के डूबने के बाद इसे देखा जा सकता है।

27-28 अक्टूबर को चांद प्लीएड्स यानी सेवन सिस्टर्स तारों के समूह के पास से गुजरेगा। इस खगोलीय नजारे को बिना किसी उपकरण के नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा।

 

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