शिवलिंग पर जल चढ़ाने का क्या है सही तरीका? जानिए 5 नियम, ऐसे अभिषेक से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ

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वाराणसी: सावन माह अब समापन की ओर है और इस दौरान भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। भोलेनाथ को शीघ्र प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है। शास्त्रों में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के अलग-अलग तरीकों का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि विधि के अनुसार जलाभिषेक करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने के पांच प्रमुख तरीके।

1. सीधे शिवलिंग पर जल अर्पित करना

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सबसे सामान्य तरीका सीधे जल अर्पित करना है। इसके लिए जल लेकर भगवान शिव के शिवलिंग पर सीधे जल चढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जलाभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसे मनोकामना पूर्ति से भी जोड़कर देखा जाता है।

2. दक्षिण दिशा में बैठकर उत्तर की ओर जल चढ़ाना

शिवलिंग पर जल अर्पित करने की दूसरी विधि में उस दिशा का ध्यान रखा जाता है, जिस ओर जलाधारी से अभिषेक का जल बहता है। मान्यता के अनुसार यदि जल उत्तर दिशा की ओर बहकर जाता है तो भक्त को दक्षिण दिशा में बैठकर या खड़े होकर उत्तर की ओर मुख करके जल अर्पित करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इस विधि से जलाभिषेक करने से रोगों से मुक्ति और उन पर विजय प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

3. माता अशोक सुंदरी के स्थान से शिवलिंग तक जल चढ़ाना

तीसरी विधि में जल की धारा को शिवलिंग की जलाधारी पर स्थित माता अशोक सुंदरी के स्थान से शुरू करके धीरे-धीरे शिवलिंग तक ले जाने की बात कही गई है। इसके बाद जल शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस तरह अभिषेक करने से कार्यों में सफलता मिलती है और भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है। जलाधारी में माता अशोक सुंदरी का स्थान उस हिस्से में माना जाता है, जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है।

4. एक ही लोटे से पांच स्थानों पर जल अर्पित करना

चौथी विधि में एक ही लोटे के जल से क्रमवार पांच स्थानों पर जल अर्पित करने की बात कही गई है। इसमें सबसे पहले भगवान गणेश, फिर भगवान कार्तिकेय, इसके बाद माता अशोक सुंदरी, फिर मुख्य जलाधारी और अंत में शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस क्रम से जल चढ़ाना भी भगवान शिव की पूजा की एक विधि मानी जाती है।

5. ऊपर टंगी जलाधारी के जरिए अभिषेक

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की पांचवीं विधि में ऊपर टंगी जलाधारी या मटकी के माध्यम से अभिषेक किया जाता है। इसमें सबसे पहले शिवलिंग के ऊपर टंगी जलाधारी में पानी भरा जाता है, जिससे बूंद-बूंद करके जल शिवलिंग पर गिरता रहता है। इसके बाद जलाधारी में बचा हुआ जल माता अशोक सुंदरी पर और अंत में शिवलिंग पर अर्पित करने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विधि को विशेष मनोकामना या किसी महत्वपूर्ण कार्य की सफलता से जोड़कर देखा जाता है।

 

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