सावन ही क्यों है भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना? स्कंद पुराण में मिलता है रहस्य, जानिए चैत्र या आषाढ़ से क्यों है अलग महत्व

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नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसे ही श्रावण मास की शुरुआत होती है, देशभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। मान्यता है कि इस महीने में की गई शिव उपासना विशेष फल प्रदान करती है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर भगवान शिव को सावन का महीना ही इतना प्रिय क्यों है? चैत्र, वैशाख या आषाढ़ की जगह श्रावण को ही विशेष महत्व क्यों प्राप्त है? इसका उत्तर पौराणिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं में छिपा हुआ है।

स्कंद पुराण में बताया गया है सावन का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद पुराण के श्रावण मास महात्म्य में भगवान शिव स्वयं श्रावण मास को अपना सबसे प्रिय महीना बताते हैं। ग्रंथ में वर्णित श्लोक के अनुसार बारहों महीनों में श्रावण मास भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय है और इस पूरे महीने उनकी विशेष पूजा-अर्चना का विधान बताया गया है।

देवी सती और पार्वती की तपस्या से जुड़ा है संबंध

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता के यज्ञ में हुए अपमान के बाद योगबल से देह त्याग दी थी, तब उन्होंने हर जन्म में भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था। अगले जन्म में देवी सती ने पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।

कथा के अनुसार, युवावस्था में माता पार्वती ने सावन के महीने में कठोर तपस्या की। उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन व्रत और साधना की। उनकी अटूट भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी घटना के कारण श्रावण मास को शिव और पार्वती दोनों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

ससुराल आगमन की मान्यता भी है प्रचलित

एक अन्य लोकमान्यता के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव पहली बार पृथ्वी पर अपने ससुराल पहुंचे थे। वहां उनका स्वागत जल और अर्घ्य अर्पित कर किया गया था। इसी कारण सावन में जलाभिषेक की परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रावण मास में भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच विराजमान रहते हैं और उनकी मनोकामनाएं सुनते हैं।

मार्कंडेय की तपस्या से भी जुड़ा है सावन का महत्व

भगवान शिव को सावन प्रिय होने के पीछे एक और प्रसिद्ध कथा का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि ऋषि मार्कंडु के पुत्र मार्कंडेय ने अल्पायु के योग को समाप्त करने और दीर्घायु प्राप्त करने के लिए सावन मास में घोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और मृत्यु के देवता यमराज भी उनकी आयु समाप्त नहीं कर सके।

धार्मिक परंपराओं में यह कथा सावन के महीने में शिव भक्ति की शक्ति और महत्व को दर्शाती है। इसी वजह से श्रावण मास को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला काल माना जाता है।

सावन में क्यों बढ़ जाता है जलाभिषेक का महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और शिव मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस महीने में की गई पूजा से वैवाहिक सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।

 

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