महिला आरक्षण अधिनियम लागू, लेकिन लागू होने के समय को लेकर जारी राजनीतिक घमासान, संसद में परिसीमन को लेकर टकराव तेज

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केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम 2023, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ भी कहा जाता है, को 16 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया है। कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम की धारा 1(2) के तहत यह तारीख निर्धारित की गई है। हालांकि, अधिनियम लागू होने के बावजूद इसके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

वर्तमान लोकसभा में लागू नहीं होगा आरक्षण
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भले ही कानून लागू हो चुका हो, लेकिन मौजूदा लोकसभा में महिला आरक्षण प्रभावी नहीं होगा। इसके लिए पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य है, जो आगामी जनगणना के आधार पर की जाएगी। यानी जमीनी स्तर पर आरक्षण लागू करने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

परिसीमन और जनगणना से जुड़ा है पूरा क्रियान्वयन
अधिकारियों का कहना है कि महिला आरक्षण को प्रभावी रूप देने के लिए लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है। यह प्रक्रिया जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन पर आधारित होगी। इसी कारण इसके व्यावहारिक लागू होने की समयसीमा अभी अनिश्चित बनी हुई है।

क्यों जारी हुई अधिसूचना?
संसद में इन दिनों महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने को लेकर तीन अहम विधेयकों पर चर्चा चल रही है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक शामिल हैं। इन प्रस्तावों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर लगभग 850 करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की योजना है। सरकार का कहना है कि 2023 के कानून को लागू करने के लिए आवश्यक तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह अधिसूचना जारी की गई है।

मूल कानून में क्या था प्रावधान?
2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके लागू होने को अगली जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था, जिससे इसके 2034 के आसपास लागू होने की संभावना जताई गई थी। अब सरकार इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

संसद में जारी बहस, विपक्ष उठा रहा सवाल
इस पूरे मुद्दे पर संसद में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन और जनगणना को लेकर अस्पष्टता है और इसके जरिए उत्तर-दक्षिण राज्यों के बीच राजनीतिक असंतुलन पैदा हो सकता है। वहीं सरकार अपने रुख पर कायम है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक सुधार है।

 

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