आपने भेजे 2000 रुपये, सामने वाले को मिले पूरे 2000… फिर UPI ऐप की कमाई कहां से होती है? जानिए पूरा बिजनेस मॉडल
नई दिल्ली: भारत में करोड़ों लोग रोजाना यूपीआई के जरिए भुगतान करते हैं। चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक कुछ ही सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाता है। खास बात यह है कि सामान्य यूपीआई भुगतान पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब लेनदेन पूरी रकम का होता है और ऐप कोई शुल्क भी नहीं लेती, तो आखिर यूपीआई ऐप्स कमाई कैसे करती हैं।
रिचार्ज और बिल भुगतान से मिलता है कमीशन
जब कोई उपभोक्ता यूपीआई ऐप के जरिए मोबाइल रिचार्ज या बिजली, गैस, पानी और डीटीएच जैसे बिलों का भुगतान करता है, तब संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी यूपीआई ऐप को तय कमीशन देती है। उपभोक्ता से बिल की पूरी राशि ही ली जाती है, लेकिन भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने के बदले ऐप को अलग से कमीशन मिलता है। कुछ सेवाओं पर कुछ ऐप प्लेटफॉर्म शुल्क भी वसूलती हैं।
साउंडबॉक्स और कारोबारियों की सेवाओं से होती है आय
यूपीआई कंपनियों की कमाई का एक बड़ा जरिया कारोबारियों को दी जाने वाली सेवाएं भी हैं। कई दुकानों पर भुगतान के बाद आवाज बताने वाला साउंडबॉक्स इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी डिवाइस उपलब्ध कराने के बदले कंपनियां दुकानदारों से मासिक किराया या सदस्यता शुल्क लेती हैं, जिससे उनकी नियमित आय होती है।
लोन, बीमा और निवेश सेवाएं भी बढ़ा रही हैं कमाई
अब यूपीआई ऐप केवल भुगतान तक सीमित नहीं रह गई हैं। इन प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसी वित्तीय सेवाएं भी उपलब्ध हैं। जब कोई उपभोक्ता इन सेवाओं का उपयोग करता है, तब बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और बीमा कंपनियां यूपीआई ऐप को कमीशन देती हैं।
विज्ञापन और ऑफर से भी होता है मुनाफा
यूपीआई ऐप्स पर अक्सर अलग-अलग ब्रांड के ऑफर, कैशबैक, कूपन और खरीदारी से जुड़े प्रचार दिखाई देते हैं। इन प्रचार अभियानों के लिए कंपनियां विज्ञापन शुल्क का भुगतान करती हैं। इसके अलावा, उपभोक्ताओं की खरीदारी और भुगतान से जुड़े रुझानों का विश्लेषण कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार ऑफर और सेवाएं दिखाई जाती हैं।
इसी मॉडल से बढ़ रहा है यूपीआई कंपनियों का कारोबार
यूपीआई भुगतान के जरिए कंपनियां करोड़ों उपभोक्ताओं को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ती हैं। इसके बाद रिचार्ज, बिल भुगतान, कारोबारी सेवाएं, विज्ञापन, ऋण, बीमा और निवेश जैसी सुविधाओं के माध्यम से आय अर्जित करती हैं। यही वजह है कि सामान्य यूपीआई लेनदेन उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त होने के बावजूद इन कंपनियों का कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है।
