राम मंदिर के CEO की रेस में 3 नाम सबसे आगे, 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू; अंतिम मुहर लगाएगा ट्रस्ट

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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है। सीईओ पद के लिए 5,300 से अधिक आवेदनों में से 16 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय, जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र और अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, अन्य 13 उम्मीदवारों के नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

सीईओ की नियुक्ति ऐसे समय हो रही है, जब मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और गबन के मामले की एसआईटी जांच के बीच पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

16 उम्मीदवारों को किया गया शॉर्टलिस्ट

चयन प्रक्रिया के तहत 16 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चुना गया है। इंटरव्यू में प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, बड़े आयोजनों के संचालन, भीड़ प्रबंधन और धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं को संभालने की क्षमता से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।

चयन समिति ने इंटरव्यू के लिए करीब 34 सवालों का प्रारूप तैयार किया है। उम्मीदवारों से उनके द्वारा संभाले गए बड़े आयोजनों की संख्या, उनमें जुटी भीड़ और आयोजन की अवधि के बारे में जानकारी ली जा रही है। इसके साथ ही बड़े कर्मचारी समूह का नेतृत्व करने के अनुभव पर भी सवाल किए जा रहे हैं।

राजेश पांडेय के पास पुलिस सेवा का लंबा अनुभव

पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार पांडेय को सीईओ पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। वह उत्तर प्रदेश कैडर के 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। इससे पहले 1986 में उनका चयन पीपीएस अधिकारी के तौर पर हुआ था। तीन दशक से अधिक समय तक पुलिस सेवा में रहने के बाद वह 30 जून 2021 को आईजी-इलेक्शन सेल के पद से सेवानिवृत्त हुए।

पांडेय लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश एसटीएफ और एटीएस के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यूपीईडा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए नोडल सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी दी थी।

दिनेश चंद्र के पास प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव

दूसरे प्रमुख दावेदार दिनेश चंद्र 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह अलीगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी, गाजियाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त और कानपुर देहात के जिलाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

दिनेश चंद्र बहराइच और सहारनपुर के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 14 सितंबर 2024 से 4 मई 2026 तक उन्होंने जौनपुर के जिलाधिकारी एवं कलेक्टर के तौर पर काम किया। फिलहाल वह लखनऊ में समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव हैं।

योगेश्वर राम मिश्रा के पास अयोध्या का सीधा अनुभव

तीसरे प्रमुख नाम योगेश्वर राम मिश्रा का है। 2005 बैच के आईएएस अधिकारी मिश्रा अयोध्या के जिलाधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में अयोध्या के डीएम की जिम्मेदारी संभाली थी।

मिश्रा बाराबंकी और वाराणसी के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई मंडलों के मंडलायुक्त के तौर पर काम किया है। मिर्जापुर के मंडलायुक्त रहते हुए उन्हें विंध्य धाम तीर्थ विकास परिषद का अतिरिक्त प्रभार भी मिला था। अयोध्या में पहले काम करने के अनुभव के चलते उन्हें धार्मिक पर्यटन, कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन की जमीनी समझ रखने वाला अधिकारी माना जा रहा है।

इंटरव्यू में आस्था और धार्मिक आदतों पर भी सवाल

सीईओ के चयन के लिए हो रहे साक्षात्कार में प्रशासनिक क्षमता के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों से भगवान राम के प्रति उनकी आस्था, हिंदू धार्मिक परंपराओं और मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर उनकी समझ जानने की कोशिश की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उम्मीदवारों से चोटी रखने, जनेऊ पहनने, शाकाहारी या मांसाहारी होने और शराब के सेवन से जुड़े सवाल भी किए जा रहे हैं। उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि वे खुद को ‘कट्टर हिंदू’ मानते हैं या धार्मिक आस्था रखते हैं।

40 से 50 मिनट तक चल रहा इंटरव्यू

16 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों में से मंगलवार को 10 उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया गया। यह प्रक्रिया बंद कमरे में ‘ग्रीन हाउस’ में हुई। उम्मीदवारों को मीडिया से बातचीत नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक उम्मीदवार का इंटरव्यू करीब 40 से 50 मिनट तक चलने की बात सामने आई है।

साक्षात्कार से पहले उम्मीदवारों को मंदिर परिसर का दौरा भी कराया गया। इसका उद्देश्य उन्हें मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की आवाजाही से परिचित कराना था।

तीन सदस्यीय समिति बनाएगी तीन नामों का पैनल

सीईओ चयन की शुरुआती प्रक्रिया की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय समिति को दी गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल हैं।

समिति 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू और उनके अनुभव का मूल्यांकन करने के बाद तीन नामों का पैनल तैयार करेगी।

अंतिम फैसला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लेगा

चयन समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन नामों का पैनल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से इन उम्मीदवारों का अंतिम इंटरव्यू लिया जाएगा। ट्रस्ट की मंजूरी के बाद एक उम्मीदवार को राम मंदिर का पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त किया जाएगा। सीईओ की नियुक्ति शुरुआती तौर पर तीन वर्ष के लिए होगी। प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है।

 

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