किन लोगों के पैर छूने से नष्ट हो जाते हैं पुण्य? प्रेमानंद महाराज ने बताए आध्यात्मिक नियम

Premanand-Maharaj

मथुरा। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज अपने प्रवचनों में जीवन से जुड़े गूढ़ आध्यात्मिक प्रश्नों के सरल उत्तर देते हैं। सत्संग के दौरान एक महिला शिक्षिका ने उनसे पूछा कि क्या किसी के पैर छूने से पुण्य कर्म नष्ट हो जाते हैं, खासकर तब जब छात्र अपने गुरु के पैर छूते हैं। इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने श्रद्धा, विनम्रता और पुण्य के गहरे संबंध को स्पष्ट किया।

क्या पैर छूने से पुण्य पर पड़ता है असर
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कुछ स्थितियों में किसी के द्वारा पैर छूने से व्यक्ति के पुण्य कर्मों पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी क्रिया ही नहीं, बल्कि उस समय मन की भावना भी महत्वपूर्ण होती है। अगर मन में अहंकार या गलत भाव आ जाए, तो पुण्य पर असर पड़ सकता है।

शिक्षिका के सवाल पर क्या बोले महाराज
महिला शिक्षिका ने बताया कि छात्र मना करने के बावजूद उनके पैर छूते हैं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यदि श्रद्धा और सम्मान भाव से कोई प्रणाम करता है, तो उसे पूरी तरह रोकना भी उचित नहीं है। यह छात्र के मन में गुरु के प्रति आदर का भाव दर्शाता है।

पुण्य सुरक्षित रखने का सरल उपाय
प्रेमानंद महाराज ने इसका आसान आध्यात्मिक समाधान बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई आपके पैर छुए, तो मन में भगवान का स्मरण करते हुए उसे प्रणाम करें। ऐसा करने से पुण्य सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने समझाया कि हर जीव में भगवान का अंश होता है, इसलिए भाव शुद्ध रखना सबसे जरूरी है।

श्रद्धा और विनम्रता का संतुलन जरूरी
महाराज के अनुसार, गुरु और शिष्य के संबंध में सम्मान, विनम्रता और शुद्ध भावना बनी रहनी चाहिए। यदि मन में ईश्वर का स्मरण और कृतज्ञता बनी रहे, तो कोई भी कर्म पुण्य नाश का कारण नहीं बनता।

 

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