मौत से पहले मिल जाती है आहट! इन जानवरों को एक हफ्ते पहले हो जाता है अपनी मृत्यु का एहसास

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नई दिल्ली। मृत्यु एक ऐसा सत्य है, जिसे कोई टाल नहीं सकता। कब, कहां और कैसे किसी का अंत होगा, यह कोई नहीं जानता। हिंदू धर्मग्रंथों में भी मृत्यु को लेकर कई रहस्यमयी संकेतों और लक्षणों का उल्लेख मिलता है। 18 महापुराणों में शामिल गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु, आत्मा की यात्रा, पाप-पुण्य, स्वर्ग और नरक के साथ-साथ मृत्यु से पहले दिखाई देने वाले संकेतों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।

गरुड़ पुराण में बताए गए मृत्यु से पहले के संकेत

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु से पहले व्यक्ति में कुछ असामान्य लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इनमें नजरों का कमजोर होना, अपनी परछाई का न दिखना, बोलने और सुनने की क्षमता का कम होना जैसे संकेत शामिल हैं। इसी तरह मान्यता है कि कुछ जानवरों को भी अपनी मृत्यु का आभास पहले ही हो जाता है। कहा जाता है कि ये जानवर मौत से करीब एक हफ्ता पहले ही खाना-पीना छोड़ देते हैं और खुद को एकांत में ले जाते हैं।

हाथी को पहले हो जाता है मृत्यु का एहसास

हाथी को दुनिया के सबसे बुद्धिमान जानवरों में गिना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, हाथियों को अपनी मृत्यु का आभास पहले ही हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मौत नजदीक आने पर हाथी भोजन छोड़ देते हैं और झुंड से अलग होकर एकांत में रहने लगते हैं।

कुत्तों को इंसानों की मौत का भी हो जाता है आभास

कुत्तों को लेकर भी ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि उन्हें न सिर्फ अपनी, बल्कि इंसानों की मृत्यु का भी आभास हो जाता है। कहा जाता है कि मृत्यु से पहले कुत्ते भी खाना-पीना छोड़ देते हैं और उनका व्यवहार अचानक बदल जाता है।

बिल्लियां भी महसूस कर लेती हैं अंतिम समय

मान्यता के अनुसार, बिल्लियों को भी मौत का संकेत करीब एक हफ्ते पहले मिल जाता है। मृत्यु के करीब आने पर बिल्लियां भोजन त्याग देती हैं और लोगों से दूर एकांत स्थान पर चली जाती हैं।

बिच्छू को लेकर भी है रहस्यमयी धारणा

कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि बिच्छू को अपनी मृत्यु का अनुमान सात दिन पहले ही हो जाता है। बताया जाता है कि वह भी मृत्यु से पहले भोजन छोड़ देता है और निष्क्रिय हो जाता है।

धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है यह रहस्य

इन सभी बातों का आधार धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं में मिलता है। विज्ञान भले ही इन दावों की पुष्टि न करता हो, लेकिन सदियों से चली आ रही ये मान्यताएं आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

 

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