157 साल का हुआ बलरामपुर अस्पताल, सोलर पैनल से लेकर लिफ्ट तक की सौगात; डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक करेंगे उद्घाटन
लखनऊ। प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों में शुमार बलरामपुर अस्पताल मंगलवार को अपने 157वें स्थापना दिवस का साक्षी बनेगा। इस खास मौके पर मरीजों की सुविधा से जुड़ी कई नई सेवाओं की शुरुआत की जाएगी। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे और अस्पताल में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए लगाए गए सोलर पैनल का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही नई लिफ्ट का उद्घाटन भी किया जाएगा।
1869 में रखी गई थी अस्पताल की नींव
बलरामपुर अस्पताल का इतिहास करीब डेढ़ सदी से भी ज्यादा पुराना है। इसकी स्थापना वर्ष 1869 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान 12 से 20 बेड की एक छोटी डिस्पेंसरी के रूप में हुई थी। वर्ष 1902 में राजा बलरामपुर ने इसका विस्तार कराया और 1947 में आजादी के बाद यह अस्पताल राज्य सरकार के अधीन आ गया। आज यह अस्पताल न सिर्फ लखनऊ बल्कि आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए लाइफलाइन बना हुआ है।
‘विरासत से विश्वास तक’ थीम पर मनाया जाएगा स्थापना दिवस
अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या के मुताबिक, इस बार स्थापना दिवस समारोह ‘विरासत से विश्वास तक’ की थीम पर आयोजित किया जाएगा। वर्तमान में अस्पताल में 776 बेड की सुविधा है, लेकिन लखनऊ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज आने के कारण अधिकतर बेड हमेशा भरे रहते हैं।
सोलर पैनल से हर महीने होगी लाखों की बचत
अस्पताल की छतों पर कुल 650 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनके शुरू होने से हर महीने करीब छह लाख रुपये की बिजली का उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ अस्पताल को निर्बाध बिजली मिलेगी, बल्कि खर्च में भी बड़ी बचत होगी।
मरीजों की सुविधा के लिए नई लिफ्ट
वार्ड-11 में अब मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक जाने के लिए रैंप का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। यहां नई लिफ्ट लगाई गई है, जिसका उद्घाटन स्थापना दिवस के मौके पर उपमुख्यमंत्री करेंगे। इससे बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट भी होगा शुरू
डॉ. कविता आर्या ने बताया कि अस्पताल परिसर में पिछले माह बनकर तैयार हुआ लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट भी अब शुरू किया जाएगा। इससे ऑक्सीजन की उपलब्धता और ज्यादा मजबूत होगी और आपात स्थितियों में मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
गुर्दा रोगियों के लिए बढ़ाई गई डायलिसिस सुविधा
सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी के अनुसार, अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में विभिन्न विभागों की ओपीडी में 10 लाख नए और 25 लाख पुराने मरीजों का इलाज किया गया, जबकि 56 हजार मरीजों को रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया।
डायलिसिस मशीनें बढ़ीं, इंतजार खत्म
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि किडनी रोगियों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से अस्पताल में डायलिसिस मशीनों की संख्या दोगुने से भी अधिक कर दी गई है। अब अस्पताल में कुल 15 डायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं। पिछले एक साल में करीब 20 हजार मरीजों की डायलिसिस की गई, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों को राहत मिली है।
