सीतापुर में धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान, नैमिषारण्य धाम का 100 करोड़ से होगा कायाकल्प; रम्पा महल बनेगा सांस्कृतिक पहचान केंद्र
सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित पौराणिक नैमिषारण्य धाम के विकास को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। शासन स्तर से 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद पूरे क्षेत्र के कायाकल्प की विस्तृत योजना तैयार कर ली गई है। इसको लेकर कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विकास कार्यों का खाका तय किया गया।
100 करोड़ की योजना से बदलेगा नैमिषारण्य का स्वरूप
जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने जानकारी दी कि नैमिषारण्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। इस धनराशि से तीर्थ क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया जाएगा।
बैठक में तय किया गया कि पर्यटन सुविधा केंद्र, तीर्थ विकास परिषद का कार्यालय भवन और राजघाट पर पार्किंग सहित आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।
कॉरिडोर और आधारभूत ढांचे पर बड़ा फोकस
नैमिषारण्य में धार्मिक और पर्यटन सुविधाओं को जोड़ने के लिए कई कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इनमें ललिता देवी मंदिर से काली बाड़ी चौराहे तक कॉरिडोर, और नैमिषारण्य-कल्ली मार्ग से राजघाट तक विस्तृत कॉरिडोर शामिल है।
इसके अलावा पंचमुखी प्लाजा, चक्रतीर्थ कुंड के पास जल निकासी व्यवस्था का पुनर्निर्माण और मनिकापुर क्षेत्र में वे-साइड एमेनिटी विकसित करने की योजना भी तैयार की गई है।
बंगाली धर्मशाला में इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे तीर्थ स्थल पर आने वाले पर्यटकों को धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी मिल सके।
रम्पा महल बनेगा सांस्कृतिक केंद्र
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ऐतिहासिक रम्पा महल को अब सीतापुर सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र के जरिए जिले की कला, संस्कृति, शिक्षा और परंपराओं को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे यह स्थान सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सके।
घाट निर्माण और बाइपास को मिली मंजूरी
बैठक के दौरान मिश्रिख सांसद अशोक रावत ने भैरमपुर रोड से गयावर गांव तक बाइपास निर्माण का प्रस्ताव रखा, जिस पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी किए गए।
इसके अलावा राजघाट के सामने गोमती नदी के किनारे अमरगंज क्षेत्र में घाट निर्माण का भी निर्णय लिया गया है, ताकि इसे राजघाट की तरह विकसित किया जा सके। सिंचाई विभाग को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नैमिषारण्य धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
