Noida PG Fire: आग से बचने को सीढ़ियों की ओर भागे ऋषभ-स्नेहा, नीचे पहुंचते ही धधक उठीं लपटें, दोनों की दर्दनाक मौत

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नोएडा: नोएडा के सेक्टर-66 स्थित मामूरा गांव में चार मंजिला पीजी भवन में लगी भीषण आग ने दो युवाओं की जान ले ली। हादसे में ऋषभ और स्नेहा आग की चपेट में आ गए, जबकि भवन में मौजूद अन्य लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग लगने के समय इमारत में करीब 65 लोग मौजूद थे। यदि यह घटना सुबह या रात के समय होती, जब भवन पूरी तरह भरा रहता, तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी।

बताया गया कि पीजी भवन में कुल 65 कमरे हैं, जहां सामान्य दिनों में करीब 265 लोग रहते हैं। चार मंजिला इमारत में नीचे आने के लिए केवल दो संकरी सीढ़ियां थीं, जिनसे एक समय में दो लोग भी आसानी से नहीं गुजर सकते थे। ऋषभ और स्नेहा पहली मंजिल पर रहते थे। आग लगते ही दोनों सबसे पहले नीचे की ओर भागे, लेकिन भूतल तक पहुंचते ही हालात बदल गए।

भूतल पर खड़े वाहनों में लगी आग बनी मौत की वजह

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भवन के भूतल स्थित कॉरिडोर में किरायेदारों के दुपहिया वाहन खड़े थे। आग फैलते ही वहां खड़े 17 दोपहिया वाहन भी आग की चपेट में आ गए। नीचे पहुंचने पर जब दोनों ने सामने आग की तेज लपटें देखीं तो वापस ऊपर लौटने की कोशिश की, लेकिन पीछे से उतर रहे अन्य लोगों की वजह से वे तेजी से सीढ़ियां नहीं चढ़ सके। इसी दौरान आग की लपटों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

मदद के लिए लगाई गुहार, फिर थम गई आवाज

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि दोनों युवाओं ने बचने के लिए काफी प्रयास किए। वे लगातार मदद के लिए आवाज लगाते रहे और उन्हें बचाने की गुहार करते रहे, लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी आवाजें बंद हो गईं। हादसे ने मौके पर मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया।

पीजी में रहते हैं छात्र, कर्मचारी और कामकाजी लोग

जानकारी के अनुसार, इस पीजी में फैक्ट्री कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड, डिलीवरी कर्मी और छात्र किराये पर रहते हैं। शाम के समय भवन पूरी तरह भर जाता है और यहां बच्चे, महिलाएं तथा बुजुर्ग भी रहते हैं। आग लगने के समय अधिकांश लोग काम पर जा चुके थे, इसलिए इमारत में केवल 65 लोग मौजूद थे।

धमाके के बाद तेजी से फैली आग

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुधवार पूर्वाह्न अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। इसके बाद शॉर्ट सर्किट होने की आशंका के बीच आग तेजी से फैल गई और धुआं पूरी इमारत की सीढ़ियों में भर गया। आग लगने के बाद लोगों ने जल्दबाजी में बाहर निकलना शुरू किया।

सुबह या रात में होता हादसा तो बढ़ सकती थी जनहानि

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा सुबह या देर रात होता, जब सभी किरायेदार भवन में मौजूद रहते, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी। संकरी सीढ़ियों और सीमित निकासी मार्ग के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बनने की आशंका थी। हालांकि आग लगने के समय कम लोग मौजूद होने के कारण अधिकांश लोग करीब दस मिनट के भीतर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

 

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