फेस्टिवल सीजन में महंगाई का बड़ा झटका! चीनी-चावल के दाम 5% से ज्यादा चढ़े, रसोई का बजट हुआ गड़बड़

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नई दिल्ली: कमजोर मानसून, वैश्विक संकट और जमाखोरी के असर से त्योहारी सीजन की शुरुआत में ही आम लोगों पर महंगाई की मार तेज हो गई है। बीते एक महीने के दौरान चीनी और चावल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने लगा है।

एक महीने में चीनी की कीमतों में तेज उछाल

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, देशभर में चीनी की थोक कीमतें पिछले एक महीने में 5 फीसदी से अधिक बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। वहीं, सालाना आधार पर इसमें 7.64 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमत 47.11 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 3 अगस्त 2026 तक 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

चावल भी हुआ महंगा, दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा असर

देशभर में चावल की औसत दैनिक खुदरा कीमत भी मासिक आधार पर 2.27 फीसदी बढ़कर 3 अगस्त को 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। एक महीने पहले इसकी कीमत 44.13 रुपये प्रति किलोग्राम थी। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में चावल की कीमतों में प्रति किलोग्राम 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर घरेलू खर्च और मासिक राशन के बिल पर पड़ रहा है।

नीति पत्र में चेतावनी, 50 फीसदी तक महंगा हो सकता है चावल

प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय के एक नीति पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण चावल उत्पादन प्रभावित होता है और देश एहतियातन बड़े पैमाने पर भंडारण शुरू कर देते हैं, तो वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, उर्वरक और ऊर्जा की बढ़ती लागत तथा एशिया के प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों पर अल-नीनो के खतरे को भी कीमतों में संभावित तेज उछाल की बड़ी वजह बताया गया है।

जानिए क्यों बढ़ रहे हैं चीनी और चावल के दाम

चीनी की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का लगभग समाप्त होना और इथेनॉल के लिए अधिक मात्रा में गन्ने का उपयोग बताया गया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर आपूर्ति में असंतुलन का लाभ उठाकर सट्टेबाजी के कारण भी कीमतों में तेजी आई है। इसका असर आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

चावल की कीमतों में वृद्धि के पीछे अल-नीनो से जुड़ी प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां, कम बारिश और जमाखोरी को प्रमुख कारण माना गया है। जमाखोरी के चलते खुले बाजार में आपूर्ति कृत्रिम रूप से घट गई है, जिससे कीमतों में और तेजी देखने को मिल रही है।

वैश्विक बाजार में तांबा रिकॉर्ड स्तर पर, महंगे हो सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद

लंदन मेटल एक्सचेंज में तांबे का तीन महीने का वायदा अनुबंध बढ़कर 13,842 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक उत्पादन में 20 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले चिली में अचानक आई बाढ़, शीतकालीन तूफान और भारी बर्फबारी के कारण प्रमुख खदानों का कामकाज प्रभावित हुआ है। इसके अलावा डाटा सेंटर और पावर ग्रिड ढांचे की बढ़ती मांग ने भी कीमतों को ऊपर पहुंचाया है। इसका असर आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन और घरेलू उपकरणों की कीमतों पर पड़ सकता है।

 

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