पेट बाहर निकलने को न करें नजरअंदाज, अंदर जमा विसरल फैट बढ़ा सकता है डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा

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नई दिल्ली: मोटापा केवल बढ़ते वजन या शरीर के बाहर दिखाई देने वाली चर्बी तक सीमित नहीं है। शरीर के भीतर जमा अतिरिक्त वसा भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। खास तौर पर पेट की गहराई में आंतरिक अंगों के आसपास जमा होने वाली विसरल फैट को मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बढ़ने का संबंध टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और फैटी लिवर समेत कई स्वास्थ्य जोखिमों से हो सकता है।

विसरल फैट सामान्य चर्बी से अलग

विसरल फैट त्वचा के नीचे जमा होने वाली सबक्यूटेनियस फैट से अलग होती है। यह पेट की गुहा के भीतर लिवर, आंत और अग्न्याशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा हो सकती है। शरीर को सामान्य रूप से कुछ मात्रा में वसा की जरूरत होती है, लेकिन आंतरिक अंगों के आसपास इसका अत्यधिक बढ़ना मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।

कई बार किसी व्यक्ति का बाकी शरीर सामान्य आकार का होने के बावजूद उसका पेट बाहर निकला हुआ दिखाई दे सकता है। इसे केवल शरीर की बनावट मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, सिर्फ पेट का आकार देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि विसरल फैट कितनी है। इसकी सही जानकारी के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार जांच की आवश्यकता हो सकती है।

इन कारणों से बढ़ सकता है पेट के अंदर फैट

विसरल फैट बढ़ने का संबंध शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठे रहने, जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाले भोजन, अधिक मीठे पेय और शरीर में कुल अतिरिक्त वसा बढ़ने से हो सकता है। उम्र और आनुवंशिक कारणों के साथ जीवनशैली भी शरीर में वसा के वितरण को प्रभावित कर सकती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस से बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा

विसरल फैट को चिंता का विषय इसलिए माना जाता है क्योंकि इसका संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं से हो सकता है। इंसुलिन वह महत्वपूर्ण हार्मोन है जो शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं तो ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय में इससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।

हार्ट डिजीज और फैटी लिवर का भी खतरा

पेट के भीतर अत्यधिक वसा का संबंध हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल, हृदय संबंधी जोखिम और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी स्थितियों से भी देखा गया है। इसके अलावा फैटी लिवर का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य का आकलन करते समय केवल शरीर के वजन को ही एकमात्र पैमाना मानना पर्याप्त नहीं है। कमर के आसपास जमा अतिरिक्त वसा और अन्य मेटाबॉलिक संकेतकों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

विसरल फैट कम करने में व्यायाम मददगार

विसरल फैट को नियंत्रित करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण हो सकती है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैराकी और अन्य एरोबिक गतिविधियां ऊर्जा खर्च बढ़ाने तथा हृदय संबंधी फिटनेस बेहतर करने में मदद कर सकती हैं। नियमित व्यायाम के साथ संतुलित खानपान अपनाना भी जरूरी है।

फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को दें प्राथमिकता

खानपान में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और सीड्स जैसे पौष्टिक तथा फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। वहीं अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन, अतिरिक्त चीनी और मीठे पेय का सेवन सीमित करना उपयोगी हो सकता है।

कमर बढ़ने के साथ शुगर या कोलेस्ट्रॉल में बदलाव तो कराएं जांच

यदि सामान्य वजन होने के बावजूद कमर का आकार लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर अथवा कोलेस्ट्रॉल में बदलाव दिखाई दे रहा है तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। समय पर स्वास्थ्य मूल्यांकन और जीवनशैली में सुधार से मेटाबॉलिक जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

 

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