सीएम योगी का 6 महीने में 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का ऐलान, KGMU के 242 चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग अब भी अटकी

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति-पत्र देने की घोषणा की है। वहीं, लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में चयनित अभ्यर्थी करीब 10 महीने से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 322 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था, जिनमें से 80 की जॉइनिंग हो चुकी है, जबकि शेष 242 अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जॉइनिंग लंबित रहने से नाराज अभ्यर्थियों ने 16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।

एक लाख नौकरियों की घोषणा के बीच नियुक्ति का इंतजार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति-पत्र देने की घोषणा से प्रदेश के युवाओं को उम्मीद जगी है। हालांकि, KGMU के चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हो रही है। अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि चयन के बाद भी जॉइनिंग में इतनी देरी क्यों हो रही है और उन्हें नियुक्ति के लिए कितने समय तक इंतजार करना पड़ेगा।

किन पदों पर हुआ था चयन?

यह मामला KGMU के विज्ञापन संख्या 230/Recruitment Cell/2024, दिनांक 22 अक्टूबर 2024 के तहत आयोजित भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। इसके अंतर्गत ओटी असिस्टेंट, मेडिकल परफ्यूजन, जूनियर एवं मेडिकल लैब टेक्नीशियन, न्यूक्लियर मेडिसिन, डेंटल टेक्नीशियन, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर, रिसेप्शनिस्ट, असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर और रेडियोथेरेपी टेक्नीशियन समेत विभिन्न पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया गया था।

चयनित अभ्यर्थियों के मुताबिक, नियुक्ति में लगातार हो रही देरी से उनके भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। उनका कहना है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद जॉइनिंग की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है।

डिप्टी सीएम से कुलपति तक लगाई गुहार

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में अभ्यर्थियों ने नियुक्ति के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, 21 सितंबर 2026 को उप मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला था। इसके बाद 24 सितंबर को KGMU के प्रवक्ता प्रो. डॉ. के.के. सिंह के कार्यालय से 30 सितंबर तक जॉइनिंग कराने की बात कही गई थी।

हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी नियुक्ति नहीं हुई। इसके बाद 5 अक्टूबर को अभ्यर्थियों ने कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद से मुलाकात की। अभ्यर्थियों का दावा है कि इस दौरान भी 15 दिनों के भीतर जॉइनिंग कराने का आश्वासन दिया गया था।

13 अक्टूबर को तीन-चार महीने और इंतजार करने की बात

अभ्यर्थियों के पत्र के मुताबिक, 13 अक्टूबर को कुलसचिव कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान नव नियुक्त कुलसचिव ने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने अभ्यर्थियों की शिकायत लिखित रूप में दर्ज कर प्रशासन से चर्चा करने का आश्वासन दिया।

इसी दिन भर्ती प्रकोष्ठ के अधिकारियों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उन्हें नियुक्ति के लिए तीन से चार महीने और इंतजार करने को कहा गया। उनके अनुसार, अधिकारियों ने यह भी बताया कि संबंधित फाइल राज्यपाल कार्यालय नहीं भेजी गई थी।

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि एक समाचार पत्र में फाइल का निस्तारण हो जाने से संबंधित खबर प्रकाशित हुई थी। हालांकि, फाइल की मौजूदा स्थिति और नियुक्ति में देरी के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और जल्द नियुक्ति की मांग

चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति से संबंधित फाइल की वर्तमान स्थिति स्पष्ट कराने, देरी के कारणों की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति जल्द सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार करने और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जॉइनिंग नहीं होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे चाहते हैं कि सरकार समयबद्ध निर्णय लेकर इस मामले का समाधान करे।

योगी सरकार की घोषणा के बीच KGMU की नियुक्तियों पर नजर

एक ओर प्रदेश सरकार अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति-पत्र देने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर KGMU के चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और उन्हें जल्द जॉइनिंग मिल सकेगी।

अब निगाहें KGMU प्रशासन और शासन के अगले कदम पर हैं। यह देखना होगा कि लंबित नियुक्तियों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और चयनित अभ्यर्थियों को जॉइनिंग की स्पष्ट समयसीमा कब तक मिलती है।

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