अचला सप्तमी रवि योग: 12 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, सूर्यपूजन से मिलेगा विशेष फल, इस मंत्र से दें भगवान भास्कर को अर्घ्य

Achala-Saptami-Ravi-Yoga-1769111904475_v

बरहट (जमुई)। अचला सप्तमी के पावन अवसर पर इस वर्ष एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ रवि योग का संयोग बन रहा है। 12 वर्षों बाद बनने वाले इस विशेष योग में भगवान सूर्य की उपासना का महत्व और भी बढ़ गया है। इसी कड़ी में जमुई जिले के प्रसिद्ध पत्नेश्वर धाम मंदिर परिसर में किउल नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर प्रांगण में 25 जनवरी को भव्य सूर्यपूजन समारोह का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और मंदिर परिसर को आकर्षक रंग-रोगन व विद्युत सज्जा से भव्य रूप दिया गया है।

अचला सप्तमी पर होता है सूर्यदेव का विशेष पूजन
सूर्य मंदिर के व्यवस्थापक अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि अचला सप्तमी के दिन सूर्यपूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य का प्राकट्य हुआ था। हर वर्ष की तरह इस बार भी बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

12 वर्षों बाद रवि योग, माना जा रहा अत्यंत कल्याणकारी
विद्वान पंडित मनोहर आचार्य के अनुसार, इस वर्ष अचला सप्तमी के दिन रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो करीब 12 वर्षों बाद आया है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की आराधना करने से आरोग्य, तेज, यश और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

किउल नदी तट का सूर्य मंदिर रोशनी से जगमगाया
किउल नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर को विशेष रोशनी से सजाया गया है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। मान्यता है कि अचला सप्तमी के दिन उपवास रखकर सूर्यपूजन करने से सात जन्मों के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मुख्य जजमान और विशिष्ट अतिथि रहेंगे मौजूद
इस वर्ष सूर्यपूजन समारोह के मुख्य जजमान रंजीत कुमार मिश्र (वैद्य जी) होंगे। कार्यक्रम में झंझारपुर सिविल कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार मिश्र की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। इस पर्व को आरोग्य सप्तमी, सूर्य सप्तमी, विधान सप्तमी, चंद्रभागा सप्तमी, भानु सप्तमी और अचला सप्तमी जैसे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है।

बिहार-झारखंड से उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन में बिहार के साथ-साथ झारखंड से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क है। पूजा समिति और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन लगातार व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।

सूर्यदेव को अर्घ्य देने के प्रमुख मंत्र
अचला सप्तमी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद इन मंत्रों के जप के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना गया है—
ॐ सूर्याय नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
ॐ घृणि सूर्याय नमः
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम। तमोऽरिं सर्वपाप्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥

 

एक नज़र