महिला आरक्षण प्रदर्शन मामले में अलका लांबा दोषी करार, 5 जून को सुनाएगा राउज एवेन्यू कोर्ट फैसला

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नई दिल्ली: महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता अलका लांबा को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का दोषी माना है। हालांकि सजा का ऐलान अब 5 जून को किया जाएगा।

यह मामला 29 जुलाई 2024 का है, जब जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन आयोजित किया गया था। पुलिस के मुताबिक उस समय इलाके में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू था और प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद भीड़ आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।

प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने और रास्ता रोकने का आरोप

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान संसद घेराव के नारे लगाए गए, बैरिकेड हटाने की कोशिश हुई और सड़क पर बैठकर रास्ता जाम किया गया। पुलिस का आरोप था कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। घटना के बाद संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया गया था।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने सुनवाई के बाद अलका लांबा को दोषी ठहराया और सजा पर बहस के लिए 5 जून की तारीख तय की है।

इन धाराओं में अदालत ने माना दोषी

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित होते हैं। कोर्ट ने अलका लांबा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 221, 223(ए) और 285 के तहत दोषी माना है।

बचाव पक्ष ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का किया दावा

अलका लांबा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और तय स्थान पर ही किया जा रहा था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं है। साथ ही किसी पुलिसकर्मी की चोट से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई। वकील ने अदालत को यह भी बताया कि वीडियो फुटेज में अलका लांबा किसी पुलिसकर्मी पर हमला करती दिखाई नहीं देती हैं।

फरवरी में खारिज हो चुकी थी पुनर्विचार याचिका

इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने दिसंबर 2025 में आदेश दिया था कि मामले में लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा करने और सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करने जैसे आरोप तय किए जाएं। अलका लांबा की ओर से इस आदेश को चुनौती देते हुए दायर पुनर्विचार याचिका को 6 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया गया था।

 

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