BRICS Summit में भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सर्वसम्मति; दुनिया के सामने दिखा दम

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भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और समूह के भीतर मौजूद मतभेदों के बीच सभी सदस्य देशों को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ पर सर्वसम्मति के लिए साथ लाना भारत की कूटनीतिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

मतभेदों के बीच भारत ने बनाई सहमति की राह

पश्चिम एशिया में जारी तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की बदलती टैरिफ नीतियों से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत ने BRICS के मंच पर संवाद और सहमति का रास्ता बनाए रखा। अलग-अलग देशों के हितों और मतभेदों के बावजूद नई दिल्ली ने बातचीत के जरिए साझा सहमति तैयार करने पर जोर दिया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय टीम को सफल आयोजन तथा आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत अन्य नेताओं ने भी भारत के नेतृत्व में सम्मेलन के आयोजन की सराहना की।

ईरान और यूएई के बीच मतभेद के बावजूद बनी सहमति

BRICS घोषणापत्र पर सहमति बनाना इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद थे। भारत ने दोनों पक्षों के बीच संवाद का रास्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों के नेतृत्व से संपर्क बनाए रखा। वहीं वार्ताकारों, शेरपाओं और घोषणापत्र तैयार करने वाली टीमों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इसके बाद ऐसी भाषा पर सहमति बनी, जिसे सभी पक्ष स्वीकार कर सके।

पश्चिम एशिया को लेकर घोषणापत्र में क्या कहा गया

नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर गहरी चिंता जताई गई। इसमें सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने तथा संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया गया।

घोषणापत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया गया। सहमति बनाने के लिए घोषणापत्र में किसी देश का नाम नहीं लेने का रास्ता अपनाया गया।

भारत के मुद्दों को भी घोषणापत्र में मिली जगह

BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर सहमति जताई। भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका के समर्थन को भी घोषणापत्र में जगह मिली।

एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों और जबरदस्ती के उपायों का विरोध करने के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा गाजा में मानवीय सहायता, संघर्ष विराम और दो-देशीय समाधान का उल्लेख किया गया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दुर्लभ खनिजों पर भी जोर

घोषणापत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक शासन, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और विकास सहयोग जैसे मुद्दों को भी जगह मिली।

भारत ने अपने हितों से जुड़े मुद्दों को भी मजबूती से सामने रखा। आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा के साथ पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा का उल्लेख BRICS घोषणापत्र में किया गया।

ग्लोबल साउथ को लेकर पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सम्मेलन के दोनों सत्रों में ग्लोबल साउथ के हितों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि विकासशील देश वैश्विक संकटों की अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अभी पीछे है।

प्रधानमंत्री ने विकासशील देशों को केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वालों की भूमिका से आगे बढ़कर नियम बनाने की प्रक्रिया में भागीदार बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

2027 में चीन करेगा BRICS की अध्यक्षता

BRICS देशों ने चीन की 2027 की अध्यक्षता और अगले शिखर सम्मेलन के आयोजन का समर्थन किया। इससे समूह में निरंतरता बनाए रखने का संदेश गया।

18वें BRICS सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर सर्वसम्मति, ईरान-यूएई संवाद की दिशा में प्रयास, आतंकवाद के खिलाफ रुख, ग्लोबल साउथ की आवाज और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को प्रमुखता से सामने लाए।

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