Meta पर करीब ₹5,000 करोड़ का बड़ा जुर्माना, बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही पर कोर्ट का सख्त फैसला

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया कंपनी मेटा को बच्चों और युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने कंपनी पर 567 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने माना कि मेटा के प्लेटफॉर्म से बच्चों और युवाओं को नुकसान पहुंचा और कंपनी को इससे जुड़े प्रभावों की भरपाई करनी होगी।

यह मामला इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा के खिलाफ चल रहे मुकदमे के दूसरे चरण से जुड़ा है। इससे पहले मार्च में भी अदालत कंपनी के खिलाफ फैसला सुना चुकी थी। इस बार अदालत ने अपने निर्णय में अमेरिका के चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट (सीओपीपीए) का हवाला दिया।

क्या है सीओपीपीए कानून?

चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट (सीओपीपीए) अमेरिका का वह कानून है, जो 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस कानून के तहत कंपनियों के लिए बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होगी जुर्माने की राशि

गुरुवार देर रात जारी फैसले में जज ब्रायन बीडशाइड ने कहा कि जुर्माने की बड़ी राशि बच्चों और युवाओं के इलाज तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च की जाएगी। फैसले के अनुसार करीब 420 मिलियन डॉलर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि शेष राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियान, रोकथाम कार्यक्रम, स्क्रीनिंग सेवाओं और अन्य संबंधित गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।

पहले भी लग चुका है भारी जुर्माना

मामले के पहले चरण में अदालत मेटा पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना भी लगा चुकी है। अदालत का कहना था कि कंपनी को इस बात की जानकारी थी कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इसके अलावा कंपनी पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया गया था।

प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव की मांग

अभियोजन पक्ष ने अदालत से मेटा के प्लेटफॉर्म में कई अहम बदलाव लागू कराने की मांग की है। इनमें उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाली सुविधाओं पर नियंत्रण, उम्र सत्यापन प्रणाली को मजबूत करना, डिफॉल्ट गोपनीयता सेटिंग्स में बदलाव और बच्चों के यौन शोषण की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना शामिल है।

हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि केवल मेटा पर बच्चों की उम्र सत्यापित करने की जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा, यदि अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर ऐसी बाध्यता लागू नहीं की जाती।

 

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