यूपी की विकास रफ्तार को केंद्र से बूस्टर डोज, 4.26 लाख करोड़ की सौगात; केंद्रीय करों में 18% हिस्सेदारी

2026_2image_13_34_565273869untitled1_1769992887628_1769992896002

केंद्रीय बजट ने उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को नई गति देने का रास्ता खोल दिया है। केंद्र सरकार के खजाने से उत्तर प्रदेश को वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 4.26 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यह राशि न सिर्फ राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देगी, बल्कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं को भी तेज रफ्तार देगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट में यूपी को मिलने वाला यह आवंटन पिछले साल के मुकाबले करीब 25 हजार करोड़ रुपये अधिक है। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त संसाधन से राज्य की विकास गति को नई ऊर्जा मिलेगी।

केंद्रीय करों में यूपी का सबसे बड़ा हिस्सा
केंद्रीय करों से राज्यों को मिलने वाली राशि में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक रखी गई है। कुल केंद्रीय करों में यूपी को लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, जो देश में सर्वाधिक है। केंद्रीय करों के तहत उत्तर प्रदेश को करीब 2.68 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यह आंकड़ा पिछले बजट की तुलना में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये ज्यादा है। अधिकारियों के अनुसार, इस मद में इनकम टैक्स से करीब 95,698 करोड़ रुपये, कॉरपोरेशन टैक्स से 78,939 करोड़ रुपये, सेंट्रल जीएसटी से 73,547 करोड़ रुपये, कस्टम ड्यूटी से 14,347 करोड़ रुपये और यूनियन एक्साइज ड्यूटी से 6,112 करोड़ रुपये मिलेंगे।

केंद्र प्रायोजित योजनाओं और कैपिटल असिस्टेंस में बढ़ोतरी
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय करों में राज्यांश के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि में भी इजाफा होगा। अगले वित्त वर्ष में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा कैपिटल असिस्टेंस के रूप में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये और सेंट्रल सेक्टर योजनाओं में 18 हजार करोड़ रुपये की राशि मिलने की संभावना है। ये आंकड़े अनंतिम हैं और इनमें आगे बढ़ोतरी भी हो सकती है।

परंपरागत उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी
केंद्रीय बजट में 200 परंपरागत औद्योगिक क्लस्टर को पुनर्जीवित करने की घोषणा की गई है। इससे उत्तर प्रदेश के वस्त्र, हस्तशिल्प, चमड़ा और खेल उद्योग जैसे परंपरागत क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही महात्मा गांधी ग्राम स्वराज कार्यक्रम के ऐलान से खादी, हथकरघा और एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं को मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रामीण और स्थानीय उद्योगों को नया बाजार मिलेगा।

हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से यूपी के 10 जिलों को फायदा
केंद्रीय बजट में घोषित सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो कॉरिडोर—दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी—उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेंगे। अब तक वंदे भारत जैसी सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का लाभ पहली बार राज्य को मिलेगा। वाराणसी से जुड़ने वाले इन कॉरिडोर से कम से कम दस जिलों—वाराणसी, भदोही, प्रयागराज, रायबरेली, लखनऊ, कन्नौज, इटावा, आगरा, मथुरा और गौतमबुद्धनगर—को सीधा फायदा होगा।

केंद्र के खजाने से यूपी को मिलने वाली प्रमुख राशि
केंद्रीय करों में राज्यांश: 2.68 लाख करोड़ रुपये
केंद्र प्रायोजित योजनाएं: 1.10 लाख करोड़ रुपये
कैपिटल असिस्टेंस: 20,000 करोड़ रुपये
सेंट्रल सेक्टर: 18,000 करोड़ रुपये
केंद्रीय ऋण व अन्य मद: 10,000 करोड़ रुपये

केंद्रीय करों में अन्य राज्यों की हिस्सेदारी
उत्तर प्रदेश: 2.68 लाख करोड़ रुपये
बिहार: 1.51 लाख करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश: 1.12 लाख करोड़ रुपये
पश्चिम बंगाल: 1.10 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र: 98,306 करोड़ रुपये
राजस्थान: 90,455 करोड़ रुपये

इन योजनाओं से यूपी को मिलेगा सीधा लाभ
महात्मा गांधी हैंडलूम योजना से वाराणसी, आजमगढ़, चंदौली और भदोही जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना से ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा, जहां यूपी की लगभग 73 प्रतिशत आबादी निवास करती है।
वाराणसी में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए पानी के जहाजों की मरम्मत का केंद्र स्थापित किया जाएगा।
5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए नई योजना में यूपी के 25 शहर शामिल होंगे।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनमें वाराणसी, मथुरा, आगरा, लखनऊ और सारनाथ प्रमुख हैं।
ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए शी-मार्ट स्थापित होंगे। यूपी में सबसे ज्यादा स्वयं सहायता समूह और 18 लाख से अधिक लखपति दीदी हैं।
जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ाई जाएगी और हर जिले में आकस्मिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
सांस्कृतिक विरासत योजना के तहत सारनाथ और हस्तिनापुर का विकास किया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। मोबाइल निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र होने के कारण यूपी को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। देश के करीब पांच करोड़ एमएसएमई में से लगभग एक करोड़ यूपी में हैं।
कैंसर, डायबिटीज समेत सात दुर्लभ बीमारियों की दवाइयां सस्ती होंगी, जिससे राज्य की बड़ी आबादी को राहत मिलेगी।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में केंद्र द्वारा 40 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान से यूपी को निवेश आकर्षित करने का बड़ा अवसर मिलेगा।

 

एक नज़र