राम मंदिर ट्रस्ट की निर्णायक बैठक आज: चढ़ावा विवाद पर होगी बड़ी चर्चा, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर टिकी नजर
अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज आयोजित होने जा रही है। इस बैठक पर देशभर की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसमें विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतरिम रिपोर्ट, वित्तीय लेखा-जोखा, ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
चढ़ावा मामले को लेकर उठे सवालों और जांच की प्रगति के बीच होने वाली यह बैठक ट्रस्ट के भविष्य और प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
एसआईटी रिपोर्ट और ऑडिट पर रहेगा फोकस
बैठक में विशेष जांच दल की अंतरिम रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट, मंदिर के आय-व्यय और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी। ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने की है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला संभव
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफों ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है। ऐसे में बैठक में इन इस्तीफों को लेकर आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। यदि इस्तीफे स्वीकार किए जाते हैं तो ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर नई नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो सकता है।
क्या कहते हैं ट्रस्ट के नियम?
ट्रस्ट डीड के अनुसार कोई भी ट्रस्टी एक महीने का पूर्व नोटिस देकर अपना इस्तीफा दे सकता है। वहीं यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ कार्य करने का आरोप लगता है तो बोर्ड ऑफ ट्रस्टी दो-तिहाई बहुमत से उसे पद से हटा सकता है। हालांकि इससे पहले संबंधित ट्रस्टी को नोटिस देना, जवाब मांगना और सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है।
नए प्रशासनिक ढांचे पर भी होगी चर्चा
बैठक केवल इस्तीफों तक सीमित नहीं रहने वाली है। ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की कार्यप्रणाली को लेकर भी मंथन होने की संभावना है। चंपत राय लंबे समय से महासचिव के रूप में मंदिर के दैनिक संचालन और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में उनके पद छोड़ने की स्थिति में नए महासचिव की नियुक्ति अहम मुद्दा बन सकती है।
11 ट्रस्टियों के पास है मतदान का अधिकार
ट्रस्ट डीड के मुताबिक बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में 11 सदस्यों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। इनमें निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि महंत दिनेन्द्र दास भी शामिल हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ट्रस्ट में स्थान मिला था।
मतदान अधिकार रखने वाले प्रमुख सदस्यों में के. परासरन, महंत नृत्यगोपाल दास, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, परमानंद जी महाराज, स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज, विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा, चंपत राय और कृष्ण मोहन शामिल हैं। वहीं केंद्र और राज्य सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारी, अयोध्या के जिलाधिकारी तथा मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ट्रस्ट से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं है।
गिरफ्तारियों के बाद बढ़े जवाबदेही के सवाल
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अब तक चढ़ावे की गणना और प्रबंधन से जुड़े आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि बैठक में इस पहलू पर भी गंभीर चर्चा हो सकती है।
