मालवा की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा दोराहा का 4-लेन रेलवे ओवर ब्रिज, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का बड़ा दावा

WhatsApp Image 2026-02-17 at 6.09.29 PM

लुधियाना में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। लेवल क्रॉसिंग संख्या 164एबी, दोराहा पर चार लेन रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण को मालवा क्षेत्र, पंजाब की राजधानी और आसपास के जिलों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली ऐतिहासिक परियोजना बताया गया है। यह बात केंद्रीय राज्य मंत्री (रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) रवनीत सिंह बिट्टू ने कही।

कार्यक्रम में अंबाला मंडल के मंडल रेल प्रबंधक विनोद भाटिया, चीफ इंजीनियर (रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट) राजीव रंजन राजू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

₹70.55 करोड़ की लागत, एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य

चार लेन आरओबी का शिलान्यास करने के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने बताया कि लगभग ₹70.55 करोड़ की लागत से बनने वाली यह परियोजना अगले एक वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा और इसे जल्द से जल्द आम जनता के लिए खोलने का लक्ष्य है। पिछले करीब 12 वर्षों से इस लेवल क्रॉसिंग पर लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था, जिससे अब राहत मिलेगी।

190 ट्रेनें, 3,000 वाहन रोज—जाम से मिलेगी मुक्ति

दोराहा का यह लेवल क्रॉसिंग रूपनगर से लुधियाना को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर स्थित है, जो पंजाब की राजधानी और पूरे मालवा क्षेत्र के बीच अहम कड़ी है। मंत्री ने जानकारी दी कि प्रतिदिन लगभग 190 ट्रेनें इस क्रॉसिंग से गुजरती हैं, जबकि 3,000 से अधिक वाहन यहां से होकर निकलते हैं। रेल यातायात के कारण बार-बार फाटक बंद होने से जाम, लंबा इंतजार और आम यात्रियों, व्यापारियों व परिवहनकर्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। आरओबी बनने के बाद इन समस्याओं से निजात मिलेगी।

प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का जताया आभार

श्री रवनीत सिंह ने इस परियोजना को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि नया चार लेन आरओबी न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि माल और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही से आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।

पंजाब में 166 रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम जारी

मंत्री ने बताया कि पंजाब में 166 स्थानों पर रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), रेलवे अंडर ब्रिज (RUB) और लो हाइट सबवे (LHS) के कार्य ₹1,480.09 करोड़ की लागत से प्रगति पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में रेलवे अवसंरचना विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है और सरकार रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण एवं विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि 2009–2014 की अवधि की तुलना में पंजाब में रेलवे का वार्षिक बजट आवंटन लगभग 25 गुना बढ़कर ₹5,673 करोड़ हो गया है। वर्तमान में राज्य में ₹26,382 करोड़ के अवसंरचना कार्य जारी हैं, जिनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास, सुरक्षा उन्नयन और क्षमता विस्तार शामिल है।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 30 स्टेशनों का कायाकल्प

मंत्री ने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पंजाब के 30 रेलवे स्टेशनों का ₹1,311 करोड़ की लागत से व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। इससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और स्टेशन परिसर को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।

दिल्ली–अंबाला रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का धन्यवाद करते हुए बताया कि दिल्ली और अंबाला के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। यह परियोजना अत्यधिक व्यस्त दिल्ली–जम्मू रेल कॉरिडोर को चौड़ा करने की व्यापक योजना का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को उत्तरी राज्यों से जोड़ता है।

194 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹5,983 करोड़ है और इसे चार वर्षों में पूरा किया जाएगा। यह हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों तथा दिल्ली के सेंट्रल, नॉर्थ वेस्ट और नॉर्थ दिल्ली क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।

लाइन क्षमता बढ़ेगी, 24.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव

Delhi–Ambala खंड देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है, जहां यात्री और माल यातायात का भारी दबाव है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, परिचालन दक्षता सुधरेगी और भीड़भाड़ में कमी आएगी। इससे अतिरिक्त यात्री एवं मालगाड़ियों का संचालन संभव होगा और समयपालन में सुधार होगा।

यह कॉरिडोर रोपड़, पानीपत और राजपुरा स्थित ताप विद्युत संयंत्रों सहित कृषि गोदामों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ता है। परियोजना के पूरा होने पर प्रतिवर्ष लगभग 24.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन संभव होगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रतिवर्ष करीब 43 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 1.7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। साथ ही अनुमानित ₹952 करोड़ प्रतिवर्ष की लॉजिस्टिक लागत बचत होगी और निर्माण चरण में लगभग 132 लाख मानव-दिवस के रोजगार सृजित होने की संभावना है।

उन्नत कॉरिडोर से श्री माता वैष्णो देवी, कटरा, श्रीनगर, जम्मू और शिमला जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जिससे पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

 

एक नज़र