बजट पर वित्त मंत्री का जवाब: इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस, MSME और युवाओं के लिए स्किल-उद्यमिता का मेगा प्लान
नई दिल्ली: संसद में बुधवार को बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर है और इसका सीधा लाभ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलेगा। उन्होंने कहा कि बजट में की गई घोषणाएं एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देंगी और रोजगार सृजन को गति देंगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट को लेकर की गई घोषणाओं से युवाओं को व्यापक लाभ होगा। साथ ही सरकार मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा देने जा रही है, जिसमें आयुष को भी शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि बजट तैयार करने से पहले राज्यों के वित्त मंत्रियों से चर्चा की गई थी। उनकी सिफारिशों के आधार पर 50 साल के लिए दिया जाने वाला बिना ब्याज का कैपिटल एक्सपेंडिचर सपोर्ट लोन अंततः एक ग्रांट के समान प्रभावी होगा।
राज्यों की सिफारिशों पर 50 साल का ब्याजमुक्त लोन
निर्मला सीतारमण ने कहा कि हर बजट से पहले राज्यों के वित्त मंत्रियों से संवाद एक सामान्य प्रक्रिया है और इस बार भी उनकी सिफारिशों को ध्यान में रखा गया। उन्होंने बताया कि राज्यों को दिया जाने वाला 50 वर्षों का ब्याजमुक्त ऋण, जो पूंजीगत व्यय के समर्थन के लिए है, लंबे समय में अनुदान के बराबर साबित होगा। इससे राज्यों को बुनियादी ढांचे के विकास में बड़ी राहत मिलेगी।
शिक्षा के साथ जुड़ेंगे कौशल और उद्यमिता केंद्र
वित्त मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि अब छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अलग से कौशल प्रशिक्षण की तलाश नहीं करनी चाहिए। सरकार की मंशा है कि कौशल विकास को औपचारिक शिक्षा का हिस्सा बनाया जाए, ताकि छात्र पढ़ाई पूरी करते ही उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा में कौशल को समाहित करने से युवा बाहर निकलते ही कह सकेंगे कि वे उद्यमी बनने के लिए तैयार हैं।
औद्योगिक क्लस्टर के पास बनेंगे मेगा उद्यमिता निर्माण केंद्र
सीतारमण ने बताया कि प्रस्तावित मेगा उद्यमिता निर्माण केंद्र औद्योगिक क्लस्टरों के निकट स्थापित किए जा सकते हैं। ये केंद्र शिक्षा हब के रूप में काम करेंगे और उच्च शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ेंगे। सरकार इस पहल के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि ऐसे विशाल उच्च शिक्षा केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां से छात्र नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि उद्यमी बनकर निकलें।
सरकार की यह पहल उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को एकीकृत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, जिससे युवाओं को रोजगार के साथ-साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी मिलेगा।
