हवन का धुआं प्रदूषण नहीं, बल्कि हवा का प्राकृतिक शुद्धिकरण? वैज्ञानिक नजरिए से समझें प्राचीन परंपरा का रहस्य

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नई दिल्ली: हवन को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन मान्यताओं और कुछ शोधों के अनुसार, हवन का धुआं प्रदूषण नहीं बल्कि एक प्राकृतिक वायु शुद्धिकरण माध्यम माना जाता है। खासकर जब आम की लकड़ी और देसी घी को एक साथ जलाया जाता है, तो उससे निकलने वाले कुछ रासायनिक यौगिक वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हवन के दौरान फॉर्मिक एल्डिहाइड जैसे तत्व निकलते हैं, जिन्हें हवा में मौजूद हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक माना जाता है। यही वजह है कि प्राचीन काल में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ हवन को पर्यावरण और स्वास्थ्य से भी जोड़ा गया।

आधुनिक शोधकर्ता भी अब इन पारंपरिक विधियों के वैज्ञानिक पहलुओं पर गंभीरता से अध्ययन कर रहे हैं। कई वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के नियमों को गहराई से समझा था और विज्ञान का व्यवहारिक उपयोग उस दौर में भी किया जाता था, जब ‘विज्ञान’ शब्द अस्तित्व में नहीं था। आज के दौर में हवन को सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के एक संभावित उपाय के रूप में भी देखा जा रहा है।

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