राज्यसभा चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट में संग्राम, मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई शुरू; कांग्रेस ने राष्ट्रपति भवन मार्च की बनाई रणनीति
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़े बहुचर्चित मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने चुनाव आयोग और रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई के दौरान उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पक्ष रख रहे हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि नामांकन रद्द करने का फैसला कानून के अनुरूप नहीं है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है, जो इस राजनीतिक और कानूनी विवाद की दिशा तय कर सकता है।
नामांकन रद्द होने से शुरू हुआ विवाद
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन कथित तौर पर जानकारी छिपाने के आरोप में रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी दर्ज नहीं की थी।
नाम वापसी की अंतिम तिथि 11 जून होने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी और इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इस फैसले ने कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है।
बीजेपी उम्मीदवार के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। कांग्रेस का तर्क है कि मामले के न्यायिक समाधान तक विजयी घोषणा की प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी में कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर भी उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति भवन तक मार्च कर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि पूरे मामले में जल्दबाजी दिखाई गई और उनके उम्मीदवार को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
‘कोई जानकारी नहीं छिपाई गई’ : मीनाक्षी नटराजन
सुनवाई के बीच मीनाक्षी नटराजन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वह कानूनी पहलुओं पर विस्तार से टिप्पणी नहीं करेंगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके ऊपर फॉर्म-26 में जानकारी छिपाने का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह सही नहीं है और किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाई नहीं गई।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संभावित आदेश पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनावी हलकों की भी नजर बनी हुई है।
