मातम से जश्न में बदला घर, अंतिम संस्कार से पहले 103 साल की गंगाबाई जिंदा हुईं, उसी दिन मनाया गया जन्मदिन
नई दिल्ली। कहते हैं किस्मत जब साथ दे तो मौत भी मात खा जाती है, लेकिन अगर यह बात आंखों के सामने सच हो जाए तो हर कोई सन्न रह जाता है। महाराष्ट्र के नागपुर जिले से ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 103 साल की बुजुर्ग महिला गंगाबाई को मृत मान लिया गया और अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी भी हो गई। मातम मनाने पहुंचे रिश्तेदार उस वक्त हैरान रह गए, जब अंतिम संस्कार से ठीक पहले गंगाबाई के शरीर में हरकत दिखी और वे जिंदा उठ बैठीं। हैरत की बात यह रही कि उसी दिन उनका जन्मदिन भी था, जो मातम से अचानक जश्न में बदल गया।
मृत समझकर शुरू हो गई थीं अंतिम संस्कार की तैयारियां
यह घटना नागपुर जिले के रामटेक क्षेत्र की है। सोमवार शाम को 103 वर्षीय गंगाबाई सखारे के शरीर में कोई हलचल नहीं दिखी, सांसें भी थमी नजर आईं। परिवार ने उन्हें मृत मान लिया और तुरंत अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। रिश्तेदारों को सूचना दे दी गई और दूर-दराज से लोग मातम में शामिल होने पहुंचने लगे।
नई साड़ी, रस्में पूरी, शव वाहन तक बुक
मंगलवार सुबह तक परंपरा के अनुसार गंगाबाई को नई साड़ी पहनाई गई, हाथ-पैर बांधे गए और नाक में रुई के फाहे लगाए गए। घर के बाहर शामियाना लगाया गया, कुर्सियां सजीं, अंतिम संस्कार की सामग्री जुटा ली गई और शव वाहन तक बुक कर लिया गया। हर कोई यही मान चुका था कि अब अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
अचानक हिले पैर, सांस लेते देख उड़े होश
इसी बीच गंगाबाई के पोते राकेश सखारे की नजर उनके पैरों पर पड़ी, जहां हल्की सी हरकत दिखी। शक होने पर जैसे ही नाक से रुई हटाई गई, गंगाबाई ने गहरी सांस ली। यह देखते ही घर में अफरा-तफरी मच गई और मातम का माहौल पल भर में खुशी में बदल गया। राकेश सखारे ने बताया कि उन्होंने पैरों में हरकत देख मदद के लिए आवाज लगाई और रुई हटाते ही गंगाबाई तेज सांस लेने लगीं।
मातम से जन्मदिन का जश्न
जिस दिन परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, उसी दिन गंगाबाई का जन्मदिन भी था। जिंदा होने की खबर फैलते ही घर में रोते चेहरों पर मुस्कान लौट आई और मातम मनाने आए लोग जन्मदिन की बधाई देकर लौटे। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे।
