ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर! बढ़ा व्यापार घाटा, महंगे कच्चे तेल से आयात बिल में बड़ा उछाल
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण देश का आयात खर्च बढ़ गया है। जून 2026 के व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापार घाटा बढ़कर लगभग 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून के दौरान देश का आयात निर्यात की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की महंगाई से बढ़ा आयात खर्च
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है।
जून 2026 में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसके अलावा उर्वरक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मशीनरी के आयात में भी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।
निर्यात बढ़ा, लेकिन व्यापार घाटा भी बढ़ गया
जून के दौरान भारत के निर्यात में भी सुधार दर्ज किया गया। देश का कुल निर्यात लगभग 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन माना गया है।
इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की वैश्विक मांग मजबूत बनी रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज हुई, जबकि हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि, आयात की रफ्तार निर्यात से अधिक रहने के कारण व्यापार घाटे में बढ़ोतरी हुई।
आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते व्यापार घाटे का प्रभाव केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। वहीं, महंगे आयात के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे कई उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना रहती है। यही वजह है कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
आगे की राह पर बनी रहेगी चुनौती
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल लंबे समय तक ऊंचा रह सकता है। इससे चालू खाते के घाटे पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है, लेकिन कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के कारण वैश्विक हालात आने वाले समय में भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बने रह सकते हैं।
