जर्मनी में भारतीय छात्रों को सच में मुफ्त मिलती है पढ़ाई? एडमिशन से लेकर रहने तक का खर्च जान लें

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विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भारतीय छात्र ऐसे देशों की तलाश करते हैं, जहां पढ़ाई का खर्च कम हो। जर्मनी भी तेजी से उनकी पसंद बन रहा है। इसकी बड़ी वजह सरकारी विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस नहीं लगना है। हालांकि, जर्मनी में पढ़ाई को पूरी तरह मुफ्त समझना सही नहीं है। छात्रों को सेमेस्टर फीस के साथ रहने-खाने और अन्य जरूरी खर्चों के लिए भी पैसे जुटाने पड़ते हैं।

जर्मन एकेडमिक एक्सचेंज सर्विस (DAAD) के आंकड़ों के मुताबिक, जर्मनी में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2020 में 28,905 थी। 2025 तक यह बढ़कर 59,419 हो गई। यानी पांच साल में भारतीय छात्रों की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई। इससे पता चलता है कि जर्मनी भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक गंतव्य बनकर उभरा है।

क्या जर्मनी में सच में मुफ्त होती है पढ़ाई?

जर्मनी में उच्च शिक्षा देने वाले संस्थानों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पहली श्रेणी में निजी विश्वविद्यालय आते हैं, जो निजी व्यक्तियों या संगठनों द्वारा संचालित होते हैं। दूसरी श्रेणी सरकारी वित्तपोषण से चलने वाले सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की है।

जर्मनी में कई सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में छात्रों से ट्यूशन फीस नहीं ली जाती। यही वजह है कि भारतीय छात्र इन संस्थानों में दाखिला लेने को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, सभी विश्वविद्यालयों और सभी पाठ्यक्रमों के लिए नियम एक जैसे नहीं हैं। कुछ संस्थानों या विशेष पाठ्यक्रमों में ट्यूशन फीस देनी पड़ सकती है।

ट्यूशन फीस नहीं, लेकिन सेमेस्टर फीस देनी होगी

सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस नहीं लगने का मतलब यह नहीं है कि पढ़ाई से जुड़ा हर खर्च खत्म हो जाता है। छात्रों को आमतौर पर हर सेमेस्टर में प्रशासनिक और अन्य सुविधाओं से जुड़ी फीस देनी होती है।

यह राशि करीब 150 से 450 यूरो प्रति सेमेस्टर बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 16 हजार से 48 हजार रुपये के बराबर है। वास्तविक फीस विश्वविद्यालय और उसके स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

इसलिए जर्मनी में शिक्षा को पूरी तरह मुफ्त कहने के बजाय ट्यूशन फीस से राहत वाली व्यवस्था कहना ज्यादा सही होगा। निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का खर्च इससे काफी अलग हो सकता है।

स्टूडेंट वीजा के लिए ब्लॉक अकाउंट भी जरूरी

जर्मनी में पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों को ट्यूशन फीस और सेमेस्टर फीस के अलावा रहने-खाने का खर्च भी उठाना पड़ता है। छात्र वीजा के लिए आमतौर पर आर्थिक संसाधनों का प्रमाण देना होता है। इसके लिए ब्लॉक अकाउंट का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें निर्धारित राशि जमा रहती है। इस रकम से छात्र जर्मनी में रहने के दौरान अपने जरूरी खर्च पूरे कर सकते हैं।

2026 के लिए लेख में दी गई जानकारी के मुताबिक, छात्र वीजा के लिए ब्लॉक अकाउंट में आमतौर पर 11,904 यूरो यानी करीब 12.66 लाख रुपये जमा करने पड़ते हैं। यह विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस नहीं, बल्कि छात्र के पास रहने और खाने जैसे खर्चों के लिए पर्याप्त धन होने का प्रमाण है। निर्धारित राशि और नियमों की पुष्टि आवेदन करने से पहले संबंधित जर्मन आधिकारिक स्रोत से कर लेनी चाहिए।

कुल मिलाकर, जर्मनी में कम खर्च पर उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर जरूर मिलता है, लेकिन इसके लिए बिना किसी खर्च के पढ़ाई संभव मान लेना गलत होगा। छात्रों को विश्वविद्यालय की फीस, रहने की लागत और वीजा के लिए जरूरी आर्थिक शर्तों को ध्यान में रखकर ही अपनी योजना बनानी चाहिए।

 

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