जीभ का रंग पीला पड़ना सिर्फ सफाई की कमी नहीं, डायबिटीज से भी हो सकता है संबंध; जानें कारण और बचाव
खराब ओरल हाइजीन से जीभ पर क्यों जमती है पीली परत?
जीभ की सतह पर छोटे-छोटे उभार होते हैं, जिन्हें पैपिला कहा जाता है। इनके बीच खाने के बारीक कण, मृत कोशिकाएं और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। अगर नियमित रूप से दांतों और जीभ की सफाई न की जाए, तो यह जमाव बढ़ने लगता है और जीभ पर सफेद या पीली परत दिखाई दे सकती है।
कुछ स्थितियों में जीभ के पैपिला सामान्य से लंबे हो जाते हैं, जिससे उनके बीच मृत कोशिकाएं और रंग छोड़ने वाले पदार्थ फंसने लगते हैं। इस स्थिति को हेयरी टंग कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि जीभ पर असली बाल उग रहे हैं, बल्कि उसकी सतह के उभार लंबे दिखाई देने लगते हैं।
मुंह सूखने और डायबिटीज के बीच क्या है संबंध?
लार मुंह को नम रखने, भोजन के छोटे कणों को हटाने और बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। जब मुंह में लार कम बनती है, तो जीभ की सतह पर कोशिकाएं, भोजन के कण और बैक्टीरिया आसानी से जमा हो सकते हैं। इससे जीभ पर परत बनने और रंग बदलने की आशंका बढ़ जाती है।
कम पानी पीना, शरीर में पानी की कमी, सोते समय मुंह से सांस लेना और कुछ दवाएं मुंह सूखने के संभावित कारण हैं। डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य स्थितियां भी मुंह के सूखेपन से जुड़ी हो सकती हैं। लार की कमी से मुंह में संक्रमण और दांतों की सड़न का खतरा भी बढ़ सकता है।
हालांकि, सिर्फ जीभ का पीला होना डायबिटीज का प्रमाण नहीं है। अगर इसके साथ बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पेशाब आना या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
धूम्रपान और तंबाकू भी बदल सकते हैं जीभ का रंग
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन जीभ पर पीली या भूरी परत बनने की वजह हो सकता है। तंबाकू में मौजूद रंग छोड़ने वाले पदार्थ जीभ की सतह पर जमा कोशिकाओं को दागदार बना सकते हैं। धूम्रपान मुंह के ऊतकों को प्रभावित करने के साथ कुछ लोगों में सूखेपन की समस्या भी बढ़ा सकता है।
तंबाकू से दूरी बनाने और मुंह की नियमित सफाई करने से कुछ मामलों में जीभ पर जमा परत कम हो सकती है। इसके अलावा, लंबे समय तक तंबाकू का इस्तेमाल मुंह की सेहत के लिए कई अन्य जोखिम भी बढ़ाता है।
चाय-कॉफी और खानपान का भी हो सकता है असर
चाय, कॉफी और गहरे रंग वाले कुछ खाद्य पदार्थ जीभ पर अस्थायी दाग छोड़ सकते हैं। इनके रंग छोड़ने वाले तत्व जीभ की सतह पर मौजूद जमाव के साथ मिलकर उसे पीला, पीला-भूरा या गहरे रंग का दिखा सकते हैं।
अगर किसी खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद जीभ का रंग बदलता है और सफाई करने पर परत कम हो जाती है, तो यह अस्थायी दाग हो सकता है। लेकिन हर बार पीली परत को चाय-कॉफी का असर मानना सही नहीं है। इसके पीछे खराब ओरल हाइजीन, मुंह का सूखापन और दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
कुछ दवाएं भी हो सकती हैं जिम्मेदार
कुछ दवाएं मुंह में लार का उत्पादन कम कर सकती हैं, जबकि कुछ दवाएं जीभ की सतह पर बैक्टीरिया के संतुलन या रंग में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं। कुछ एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल के बाद भी जीभ पर असामान्य परत दिखाई दे सकती है। कुछ माउथवॉश में मौजूद तत्व भी जीभ के रंग में बदलाव से जुड़े हो सकते हैं।
अगर कोई दवा लेने के बाद जीभ का रंग बदलने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद न करें।
जीभ की सफाई कैसे करें और कब डॉक्टर को दिखाएं?
जीभ पर परत जमने की समस्या कम करने के लिए रोजाना दांतों के साथ जीभ की भी धीरे-धीरे सफाई करें। पर्याप्त पानी पिएं, तंबाकू और धूम्रपान से बचें तथा मुंह की स्वच्छता बनाए रखें। जीभ को जोर से रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे सतह पर जलन हो सकती है।
अगर जीभ का पीलापन लंबे समय तक बना रहे, बार-बार लौट आए या इसके साथ दर्द, घाव अथवा अन्य असामान्य लक्षण हों, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच कराएं। अगर आंखों के सफेद हिस्से और त्वचा में भी पीलापन दिखाई दे, तो जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह पीलिया जैसी स्थिति का संकेत हो सकता है।
