पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानिए इसके पीछे छिपा है दिमाग और नसों का साइंस
अक्सर आपने देखा होगा कि नहाते समय या ज्यादा देर तक पानी में रहने के बाद हाथों और पैरों की उंगलियां सिकुड़ जाती हैं और उन पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। पहली नजर में ऐसा लगता है कि त्वचा ने पानी सोख लिया है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा रोचक है। यह बदलाव सिर्फ त्वचा की वजह से नहीं होता, बल्कि इसके पीछे हमारे दिमाग और नसों की अहम भूमिका होती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे शरीर की एक स्मार्ट और एडवांस ट्रिक मानते हैं।
पानी में जाते ही क्यों बदलने लगती हैं उंगलियां?
जब इंसान लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहता है, तो हाथों और पैरों की उंगलियों की त्वचा धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है। आम धारणा यह है कि स्किन पानी सोख लेती है, लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसका पानी से कोई सीधा संबंध नहीं है। असल में यह पूरी प्रक्रिया हमारे नर्वस सिस्टम द्वारा नियंत्रित होती है और इसे एक न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन माना जाता है, जो दिमाग के निर्देश पर होता है।
दिमाग कैसे भेजता है सिकुड़ने का सिग्नल?
पानी में ज्यादा देर रहने पर उंगलियों में मौजूद नसें सक्रिय हो जाती हैं और दिमाग को संकेत भेजती हैं। इसके बाद ब्लड वेसल्स यानी खून की नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। जब उंगलियों में खून की मात्रा कम हो जाती है, तो ऊपर की त्वचा अंदर की ओर खिंच जाती है। इसी खिंचाव के कारण उंगलियों पर झुर्रियां नजर आने लगती हैं। यह एक पूरी तरह से नियंत्रित और प्राकृतिक प्रक्रिया है।
क्या यह किसी बीमारी का संकेत है?
नहाते समय या पानी में रहने के बाद उंगलियों का सिकुड़ना किसी भी तरह की बीमारी नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक यह इस बात का संकेत होता है कि आपकी नसें सही तरीके से काम कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की नसों में गंभीर समस्या होती है, उनकी उंगलियां पानी में भी नहीं सिकुड़तीं। ऐसे में झुर्रियां पड़ना शरीर के स्वस्थ होने का एक सकारात्मक संकेत भी माना जाता है।
सिकुड़ने से शरीर को क्या फायदा होता है?
उंगलियों का सिकुड़ना सिर्फ देखने में अजीब नहीं लगता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा फायदा छिपा होता है। सिकुड़ी हुई उंगलियों से गीली चीजों को पकड़ना आसान हो जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि झुर्रियों की वजह से स्किन पर छोटे-छोटे ग्रूव्स बन जाते हैं, जिससे पानी बाहर निकल जाता है और पकड़ मजबूत हो जाती है। यह ठीक वैसे ही काम करता है जैसे गाड़ी के टायरों की ग्रिप गीली सड़क पर बेहतर पकड़ देती है।
शरीर की स्मार्ट डिजाइन का उदाहरण
इंसान का शरीर हालात के अनुसार खुद को ढालने में पूरी तरह सक्षम है। पानी में उंगलियों का सिकुड़ना इसी स्मार्ट डिजाइन का एक उदाहरण है। यह प्रक्रिया अपने आप शुरू होती है और पानी से बाहर आते ही धीरे-धीरे सामान्य हो जाती है। इसके लिए किसी दवा या इलाज की जरूरत नहीं होती।
कब हो सकता है चिंता का कारण?
अगर लंबे समय तक पानी में रहने के बाद भी उंगलियां बिल्कुल भी नहीं सिकुड़तीं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। यह नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि ज्यादातर मामलों में उंगलियों का सिकुड़ना पूरी तरह सामान्य होता है और चिंता की कोई बात नहीं होती।
