सुबह का हल्दी-अदरक शॉट करेगा बॉडी डिटॉक्स, इम्यूनिटी बढ़ाने में भी माना जाता है असरदार

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आयुर्वेद में हल्दी और अदरक को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर रोजाना सुबह हल्दी और अदरक का शॉट पिया जाए तो इससे शरीर को कई स्तर पर लाभ मिल सकते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद मिलती है।

अक्सर लोग दिन की शुरुआत चाय या कॉफी से करते हैं, लेकिन अगर इस रूटीन में बदलाव कर सुबह खाली पेट हल्दी और अदरक का शॉट शामिल किया जाए, तो यह शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आयुर्वेद में इन दोनों जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल लंबे समय से दवा के रूप में किया जाता रहा है।

हल्दी और अदरक दोनों ही प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यही कारण है कि इनके नियमित सेवन से शरीर को अंदर से साफ रखने और बीमारियों से बचाने में मदद मिल सकती है।

इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में सहायक

हल्दी और अदरक के शॉट में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक गुण इम्यून सिस्टम को सपोर्ट कर सकते हैं। हल्दी में पाए जाने वाला करक्यूमिन इम्यूनिटी बूस्ट करने में अहम भूमिका निभाता है। नियमित सेवन से संक्रमण और वायरस से लड़ने की शरीर की क्षमता बढ़ सकती है।

पाचन तंत्र को करता है बेहतर

Cleveland Clinic के अनुसार, ताजा अदरक पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह मतली, उल्टी और पाचन संबंधी समस्याओं में मदद कर सकता है। वहीं हल्दी अपने सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण डाइजेशन को सपोर्ट करती है और पेट को हल्का रखने में सहायक हो सकती है।

लिवर डिटॉक्स में निभाता है भूमिका

हल्दी को लिवर फंक्शन सपोर्ट करने वाला माना जाता है। यह शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस में मदद कर सकती है, जिससे लिवर बेहतर तरीके से काम कर पाता है और शरीर में जमा गंदगी बाहर निकलने में सहायता मिलती है।

ब्रेन फंक्शन को सपोर्ट

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह मेमोरी को बेहतर बनाने, ब्रेन फॉग कम करने और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के खतरे को घटाने में मदद कर सकता है। वहीं अदरक भी दिमाग की कार्यप्रणाली को बेहतर करने और अल्जाइमर जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक हो सकता है।

सूजन और क्रोनिक इंफ्लेमेशन में राहत

हल्दी और अदरक दोनों में नेचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में मौजूद क्रोनिक सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। क्रोनिक इंफ्लेमेशन को अर्थराइटिस, जोड़ों का दर्द, हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसी कई बीमारियों से जोड़ा जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की दवा या चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या नियमित सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 

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