MBBS में अब नहीं मिलेगा 5वां मौका, रेगुलर-सप्लीमेंट्री मिलाकर सिर्फ 4 अटेंप्ट; हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
कोच्चि: एमबीबीएस छात्रों के लिए केरल हाईकोर्ट ने फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा पास करने के लिए छात्र को अधिकतम चार ही प्रयास मिल सकते हैं। इन चार प्रयासों में नियमित के साथ पूरक परीक्षा के प्रयास भी शामिल होंगे। चारों अवसर समाप्त होने के बाद छात्र को पांचवां या अतिरिक्त मौका नहीं दिया जा सकता।
यह फैसला स्नातक चिकित्सा विनियम 2023 और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशा-निर्देशों के आधार पर दिया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फर्स्ट प्रोफेशनल चरण को निर्धारित चार साल की अवधि के भीतर ही पूरा करना होगा।
चार साल के भीतर पास करनी होगी फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा
केरल हाईकोर्ट के जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि एमबीबीएस के प्रथम चरण यानी फर्स्ट प्रोफेशनल को पास करने के लिए अधिकतम चार प्रयास उपलब्ध हैं। इस चरण को सफलतापूर्वक पूरा करने की कुल अवधि भी चार साल से ज्यादा नहीं हो सकती।
कोर्ट के मुताबिक, चार प्रयासों की गणना में केवल नियमित परीक्षा ही नहीं, बल्कि पूरक परीक्षा भी शामिल है। ऐसे में कोई छात्र चारों अवसर इस्तेमाल करने के बाद यह दलील देकर अतिरिक्त मौका नहीं मांग सकता कि इनमें से कुछ प्रयास पूरक परीक्षाओं के थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला केरल के कोल्लम की एक प्रथम वर्ष की एमबीबीएस छात्रा से जुड़ा है। छात्रा ने वर्ष 2023 में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। वह फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा में सफल नहीं हो सकी और तीन विषयों में फेल हो गई।
छात्रा के चारों परीक्षा प्रयास पूरे हो चुके थे। इसके बाद उसने केरल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अगली एमबीबीएस परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी।
छात्रा ने मांगा था एक और मौका
छात्रा की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि नियमों में बताए गए चार प्रयासों में सिर्फ नियमित परीक्षाओं को शामिल किया जाना चाहिए। उसके मुताबिक, पूरक परीक्षाओं को चार प्रयासों की सीमा में नहीं गिना जाना चाहिए।
छात्रा ने अदालत से निर्धारित चार साल की अवधि के भीतर एक और अवसर देने का अनुरोध किया। उसने इस अतिरिक्त अवसर को विशेष या दया के आधार पर मिलने वाला मौका देने की मांग की थी।
हालांकि, केरल सरकार, केरल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने अतिरिक्त अवसर देने का विरोध किया। इन संस्थाओं का कहना था कि मौजूदा नियम चार प्रयास पूरे होने के बाद किसी अतिरिक्त अवसर की अनुमति नहीं देते।
एनएमसी के नियमों में क्या है प्रावधान?
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, फेज-1 एमबीबीएस परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार प्रयास निर्धारित हैं। इस चरण को पूरा करने के लिए कुल चार साल की समय सीमा भी तय है।
अगर कोई छात्र पूरक परीक्षा में असफल होता है तो उसे जूनियर बैच में जाना होगा। छात्रों के लिए अलग से पूरक बैच नहीं बनाया जाएगा। वहीं, अगर कोई छात्र परीक्षा में बिल्कुल शामिल नहीं होता है तो उस परीक्षा को उसके प्रयास के तौर पर नहीं गिना जाएगा।
लेकिन यदि छात्र परीक्षा में आंशिक रूप से शामिल होता है तो उसे एक प्रयास माना जाएगा।
मेडिकल शिक्षा के मानकों को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
अतिरिक्त मौका देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने मेडिकल शिक्षा के मानकों और उससे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा को अहम माना। अदालत ने कहा कि चिकित्सा छात्रों की शिक्षा और प्रशिक्षण का सीधा संबंध भविष्य में दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं से है।
डॉक्टर की योग्यता और क्षमता का सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ता है। इसलिए मेडिकल शिक्षा के लिए निर्धारित मानकों और नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने चार प्रयास पूरे कर चुकी छात्रा को एक और अवसर देने की मांग स्वीकार नहीं की।
