अमेरिका-ईरान में फिर भड़की जंग, लारक द्वीप पर US हमला; ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से किया पलटवार
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने से बनी सैन्य खामोशी रविवार को फिर टूट गई। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए जोर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के जवान लारक द्वीप पर ऐसे रॉकेट तैयार कर रहे थे, जिनका इस्तेमाल समुद्र में बारूदी सुरंगे बिछाने के लिए किया जाना था। अमेरिका ने इसी खतरे को देखते हुए हमला करने का दावा किया है। यह 29 जुलाई के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली सीधी सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है।
इससे पहले अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़ा हमला किया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई होती रही। करीब छह महीने से जारी इस संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी तनाव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्गों में शामिल है और यहां जहाजों की आवाजाही को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला क्यों हुआ?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, लारक द्वीप पर कार्रवाई का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात को सुरक्षित रखना था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के जवान ऐसे रॉकेट तैयार कर रहे थे, जिनसे समुद्री बारूदी सुरंगे दागी जा सकती थीं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि कार्रवाई में कई सैन्यकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
ईरान ने जोर्डन में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमले के कुछ ही घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जोर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने की जिम्मेदारी ली। इनमें अमेरिकी संचालित किंग हुसैन एयरबेस और अल-अजरक एयरबेस शामिल हैं।
ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया कि हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के रखरखाव से जुड़ी सुविधाओं, तकनीकी ढांचे और लड़ाकू विमानों से संबंधित ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने लगभग सभी ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप पर बढ़ा घरेलू दबाव
अमेरिका की ओर से यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब नवंबर में वहां मध्यावधि चुनाव होने हैं। ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी बहस तेज हो रही है। डेमोक्रेटिक सीनेटर जैक रीड ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा है कि छह महीने बीतने के बावजूद युद्ध का कोई घोषित लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक चल रहे संघर्ष से मध्य पूर्व में अमेरिका की स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
