महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा सत्र से पहले सियासी संग्राम, सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा वार—‘देख सपाई, बिटिया घबराई’

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उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। विपक्षी दलों को घेरते हुए उन्होंने कहा कि इन पार्टियों के “रग-रग में नारी का अपमान” भरा हुआ है और जब भी इन्हें सत्ता मिली, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े।

‘सपा शासन में गूंजता था—देख सपाई, बिटिया घबराई’

विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने सपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके शासनकाल में प्रदेश में महिलाओं के प्रति असुरक्षा का माहौल था। उन्होंने कहा कि उस दौर में “देख सपाई, बिटिया घबराई” जैसे नारे आम हो गए थे, जो उस समय की स्थिति को दर्शाते हैं।

विशेष सत्र का उद्देश्य—निंदा प्रस्ताव पारित करना

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह विशेष सत्र सपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के महिला विरोधी रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने के लिए बुलाया गया है। उनका आरोप है कि इन दलों ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन को लागू होने से रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज का सत्र इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है।

विपक्ष से सीधा सवाल—विरोध क्यों किया, जवाब दें

सीएम योगी ने विपक्षी दलों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें नैतिक साहस है तो वे सदन में आकर महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने की वजह बताएं। उन्होंने कहा कि अगर उनके नेताओं से गलती हुई है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए या फिर निंदा प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण बनाम ‘अवरोध की राजनीति’

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के रास्ते में बाधाएं खड़ी की हैं। उन्होंने शाहबानो प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि इन दलों का इतिहास महिलाओं के अधिकारों के प्रति सकारात्मक नहीं रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार नारी गरिमा और स्वावलंबन को बढ़ावा दे रही है, जबकि विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है।

सपा का पलटवार, पोस्टर-बैनर के साथ प्रदर्शन

वहीं समाजवादी पार्टी के नेता भी पूरी तैयारी के साथ सदन पहुंचे। उन्होंने पोस्टर और बैनर के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। सपा विधायकों ने सदन के बाहर प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे पर सिर्फ दिखावा कर रही है और वास्तव में आरक्षण लागू नहीं करना चाहती। उनके हाथों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग वाली तख्तियां भी नजर आईं।

 

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