राधा अष्टमी 2026: जन्म के बाद क्यों बंद थीं राधा रानी की आंखें? श्रीकृष्ण को देखते ही खुली थीं पलकें, पढ़ें प्रचलित कथा
नई दिल्ली: आज 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर राधा-कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा रानी का प्राकट्य वृषभानु जी और कीर्ति देवी के घर दिव्य बालिका के रूप में हुआ था। कथा के अनुसार, जन्म के बाद राधा रानी ने अपनी आंखें बंद रखी थीं और श्रीकृष्ण के दर्शन होने पर पहली बार अपनी पलकें खोली थीं। राधा अष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और राधा रानी के प्राकट्य की कथा सुनते हैं। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 01 मिनट से 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
वृषभानु जी के घर हुआ राधा रानी का प्राकट्य
प्रचलित कथा के अनुसार, ब्रज में वृषभानु जी अपनी पत्नी कीर्ति देवी के साथ रहते थे। दोनों भगवान के परम भक्त थे और लंबे समय से संतान की प्रतीक्षा कर रहे थे। एक दिन उनके घर एक दिव्य बालिका का प्राकट्य हुआ। बेटी के जन्म से पूरे घर में खुशी का माहौल बन गया। वृषभानु जी और कीर्ति देवी अपनी पुत्री को देखकर भावुक हो उठे।
बालिका बेहद सुंदर थी और उसके चेहरे पर दिव्य तेज दिखाई देता था। माता-पिता ने उसका नाम राधा रखा। राधा रानी के जन्म की खबर मिलते ही ब्रज के लोग बधाई देने के लिए वृषभानु जी के घर पहुंचने लगे।
जन्म के बाद क्यों बंद थीं राधा रानी की आंखें?
राधा रानी के जन्म के बाद माता-पिता के सामने एक बात चिंता का कारण बन गई। बालिका अपनी आंखें नहीं खोल रही थी। माता कीर्ति उन्हें गोद में लेकर दुलारतीं, उनके चेहरे को निहारतीं और आंखें खोलने के लिए मनातीं, लेकिन राधा रानी की आंखें बंद ही रहती थीं।
वृषभानु जी भी अपनी पुत्री को देखकर चिंतित रहते थे। परिवार के लोगों को यह सामान्य घटना नहीं लगती थी। उनकी मान्यता थी कि यह बालिका साधारण कन्या नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का स्वरूप है।
नंद बाबा के घर से आया निमंत्रण
कुछ समय बाद नंद बाबा और माता यशोदा बालक श्रीकृष्ण को लेकर वृषभानु जी के घर पहुंचे। उस समय श्रीकृष्ण बहुत छोटे थे। उनके आने से पूरे घर में खुशी का माहौल बन गया। माता यशोदा ने राधा रानी को गोद में लिया और उन्हें बालक श्रीकृष्ण के पास लेकर आईं।
कथा के अनुसार, जैसे ही राधा रानी ने श्रीकृष्ण की मौजूदगी महसूस की, उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल दीं। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। माता कीर्ति की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने अपनी बेटी को सीने से लगा लिया।
श्रीकृष्ण को देखकर पहली बार खोली आंखें
भक्तों की मान्यता है कि राधा रानी ने जन्म के बाद पहली बार श्रीकृष्ण के दर्शन करने के लिए अपनी आंखें खोली थीं। इसी वजह से राधा-कृष्ण के संबंध को बेहद पवित्र और अटूट माना जाता है।
ब्रज की धार्मिक कथाओं में राधा रानी और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विशेष महत्व है। दोनों का नाम एक साथ लिया जाता है। राधा रानी को प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
राधाष्टमी पर होती है विशेष पूजा
राधाष्टमी के दिन भक्त राधा रानी का स्मरण करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और कई जगह राधा रानी का अभिषेक भी किया जाता है। भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और राधा-कृष्ण के नाम का जाप करते हैं।
मान्यता है कि राधाष्टमी के दिन श्रद्धा के साथ राधा रानी की कथा सुनने और उनका ध्यान करने से मन को शांति मिलती है। भक्त परिवार की सुख-समृद्धि, प्रेम और खुशहाली की कामना करते हैं।
राधाष्टमी पर कैसे करें व्रत और पूजा
राधाष्टमी के दिन श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ भक्त निर्जल उपवास करते हैं, जबकि कुछ फलाहार करते हैं। पूजा के लिए राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद फूल, धूप, दीप और भोग अर्पित किया जाता है।
पूजा के दौरान राधा रानी की प्रचलित कथा पढ़ी या सुनी जाती है। अंत में आरती करके प्रसाद बांटा जाता है। भक्त राधा रानी से मनोकामना पूरी होने और परिवार में प्रेम, शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
