होर्मुज स्ट्रेट में लगा समुद्री जाम! अमेरिका-ईरान समझौते के बाद जहाजों की लंबी कतार, लागू हुए नए सख्त नियम
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। हालांकि लंबे समय तक प्रतिबंध और सीमित संचालन के कारण अब इस जलमार्ग पर जहाजों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। स्थिति ऐसी बन गई है कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री जाम जैसे हालात पैदा हो गए हैं और जहाजों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
बढ़ते दबाव और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब किसी भी जहाज को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने के लिए कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट अनुरोध जमा करना होगा। इसके साथ ही जहाजों को पूरी यात्रा के दौरान अथॉरिटी के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना अनिवार्य होगा।
48 घंटे पहले देनी होगी पूरी जानकारी
नए नियमों के तहत जहाज संचालकों को अपनी यात्रा का पूरा विवरण, मार्ग, संपर्क जानकारी और जहाज से जुड़ी आवश्यक सूचनाएं पहले से उपलब्ध करानी होंगी। अथॉरिटी ने इसके लिए अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन ट्रांजिट आवेदन की सुविधा भी शुरू की है।
अधिकारियों के मुताबिक, होर्मुज के नजदीक पहुंचने से पहले ही जहाजों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। किसी भी प्रकार की सूचना में कमी या संपर्क टूटने की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी जहाज के मालिक की मानी जाएगी।
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है होर्मुज
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार की रीढ़ माना जाता है। खाड़ी देशों से होने वाले लगभग 80 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का रास्ता इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।
भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।
युद्ध के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
अमेरिकी हमले के बाद मार्च से इस जलमार्ग पर सामान्य आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। केवल चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही थी और सुरक्षा खतरे लगातार बने हुए थे।
युद्ध के दौरान समुद्री क्षेत्र में बारूदी सुरंगें भी बिछाई गई थीं। इसी कारण अब जहाजों की आवाजाही को सख्त निगरानी और निर्धारित मार्गों के तहत संचालित किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
60 दिनों तक नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
समझौते के तहत ईरान ने अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों से किसी भी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क नहीं लेने का फैसला किया है। सुरक्षा, पर्यावरण और अन्य परिचालन सेवाओं के नाम पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि में रखरखाव और संचालन से जुड़े सभी खर्च ईरान सरकार स्वयं वहन करेगी ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाया जा सके।
जहाजों की संख्या में आया बड़ा उछाल
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को कम से कम 25 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरे। इसके विपरीत अप्रैल महीने में प्रतिदिन केवल 7 से 8 जहाजों को ही गुजरने की अनुमति मिल पा रही थी।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब समझौते के बाद धीरे-धीरे गतिविधियां सामान्य होने लगी हैं।
शांति वार्ता से पहले बढ़ा नया तनाव
इस बीच क्षेत्रीय हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव बढ़ गया।
लेबनान में इजरायली हवाई हमलों के बाद निर्धारित वार्ता स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा भी रद्द कर दिया गया। इससे मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
वैश्विक बाजार की नजर होर्मुज पर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में गतिविधियों का सामान्य होना वैश्विक तेल और गैस बाजार के लिए राहत की खबर है। हालांकि क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए दुनिया भर के ऊर्जा बाजार और शिपिंग कंपनियां अब भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
