3 साल कोमा के बाद थाईलैंड की राजकुमारी का निधन, दुनिया भर में शोक, भारत ने जताई संवेदना
बैंकॉक: थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा नरेन्द्रदेब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह पिछले तीन वर्षों से कोमा में थीं और लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन की पुष्टि थाई सरकार और शाही परिवार की ओर से की गई है, जिसके बाद देश और दुनिया भर से शोक संदेश आने लगे हैं।
भारत ने जताया शोक, योगदान को बताया प्रेरणादायक
बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास ने राजकुमारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। दूतावास ने थाईलैंड के शाही परिवार और जनता के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि पब्लिक सर्विस और कूटनीति के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। भारत ने इस दुख की घड़ी में थाईलैंड के साथ एकजुटता व्यक्त की है।
2022 में बिगड़ी थी तबीयत, तीन साल से थीं कोमा में
जानकारी के अनुसार, राजकुमारी को 15 दिसंबर 2022 को उस समय अस्पताल में भर्ती कराया गया था जब वह अपने पालतू कुत्ते के साथ ट्रेनिंग के दौरान अचानक गिर पड़ी थीं। इसके बाद उनकी हालत गंभीर होती चली गई और वह कोमा में चली गईं। बताया गया कि दिल से जुड़ी समस्या और बाद में हुए गंभीर संक्रमण ने उनकी स्थिति और बिगाड़ दी।
11 जून 2026 को ली अंतिम सांस
थाई सरकार के मुताबिक, राजकुमारी ने 11 जून 2026 को बैंकॉक के किंग चुलालोंगकोर्न मेमोरियल अस्पताल में अंतिम सांस ली। डॉक्टरों की निगरानी में उन्होंने शाम 7 बजकर 48 मिनट पर दुनिया को अलविदा कहा। लंबे इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
शाही परंपरा के अनुसार होगा अंतिम संस्कार
थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न ने शाही परंपराओं के अनुसार राजकीय अंतिम संस्कार के निर्देश दिए हैं। उनके पार्थिव शरीर को बैंकॉक के ग्रैंड पैलेस में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।
सामाजिक कार्यों और कानूनी क्षेत्र में अहम योगदान
राजकुमारी बज्रकितियाभा अपने सामाजिक कार्यों और कानूनी क्षेत्र में योगदान के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने ‘कमलंगजाई’ नामक अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य महिला कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था। उनके कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई, UN में भी निभाई भूमिका
उन्होंने अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की थी और बाद में संयुक्त राष्ट्र में थाईलैंड के स्थायी मिशन में कार्य किया। वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत भी रहीं और 2017 में संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय की सद्भावना राजदूत नियुक्त की गई थीं।
