भारत में भी सोशल मीडिया पर लगेगी उम्र की लगाम? आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार के सख्त संकेत, ‘डिजिटल लत’ पर जताई चिंता

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नई दिल्ली। भारत में सोशल मीडिया और ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए उम्र सीमा तय करने की दिशा में सरकार गंभीरता से विचार कर सकती है। संसद में गुरुवार को पेश वार्षिक आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में देश के बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ती डिजिटल लत को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि सोशल मीडिया और सट्टेबाजी ऐप्स तक पहुंच के लिए आयु-आधारित सीमाएं तय करने पर विचार किया जाना चाहिए।

यह आर्थिक सर्वेक्षण ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ ही दिनों में केंद्रीय बजट पेश होना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में आर्थिक समीक्षा की प्रति सदन के पटल पर रखी। यह दस्तावेज देश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक रुझानों और आने वाली चुनौतियों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती के संकेत
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का अत्यधिक उपयोग न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है, बल्कि उत्पादकता और सामाजिक व्यवहार में भी नकारात्मक बदलाव ला रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों और युवाओं को डिजिटल लत से बचाने के लिए अब केवल जागरूकता नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत कदम जरूरी हैं।

प्लेटफॉर्म्स की बढ़ेगी जिम्मेदारी
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन गैंबलिंग ऐप्स को एज वेरिफिकेशन लागू करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाए कि नाबालिग यूजर्स प्लेटफॉर्म्स तक आसानी से पहुंच न बना सकें।

ऑटो-प्ले और टारगेटेड विज्ञापन पर लगाम
आर्थिक सर्वेक्षण में ‘ऑटो-प्ले वीडियो’ और ‘टारगेटेड एडवर्टाइजिंग’ जैसे फीचर्स को बच्चों और युवाओं के लिए नियंत्रित करने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यही फीचर्स स्क्रीन टाइम बढ़ाने और डिजिटल लत को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

परिवारों की भूमिका भी अहम
सरकार ने केवल कानून पर निर्भर रहने के बजाय सामाजिक बदलाव पर भी जोर दिया है। आर्थिक सर्वेक्षण में परिवारों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों के लिए स्क्रीन-टाइम लिमिट, डिवाइस-फ्री आवर्स और साझा ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा दें।

भारत: सोशल मीडिया का सबसे बड़ा बाजार
वर्तमान में भारत फेसबुक (Meta), यूट्यूब (Alphabet) और X जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। इसके बावजूद, देश में सोशल मीडिया उपयोग के लिए कोई एकसमान राष्ट्रीय न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण ने इस खालीपन की ओर इशारा करते हुए ‘एज-एप्रोप्रियेट डिफॉल्ट्स’ लागू करने की जरूरत बताई है।

दुनिया के इन देशों में पहले से सख्त कानून
दुनियाभर में सोशल मीडिया पर उम्र सीमा को लेकर बहस तेज हो चुकी है और कई देशों ने सख्त कानून लागू कर दिए हैं।

ऑस्ट्रेलिया: सबसे कड़ा कदम
ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में दुनिया का सबसे सख्त कानून लागू किया। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने पर कंपनियों पर करीब 49.5 मिलियन AUD (लगभग 270 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लग सकता है।

फ्रांस
फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध की तैयारी है। जनवरी 2026 में नेशनल असेंबली ने इस संबंध में विधेयक को मंजूरी दी है, जिसे सितंबर 2026 तक लागू करने का लक्ष्य है।

अमेरिका
अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर एक समान कानून नहीं है, लेकिन कई राज्यों ने सख्त नियम बनाए हैं। COPPA कानून के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा पर कड़ा नियंत्रण है।

यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। न्यूनतम उम्र सीमा 13 से 16 साल के बीच तय करने की छूट सदस्य देशों को दी गई है।

भारत में आगे क्या?
भारत में फिलहाल 18 साल से कम उम्र के बच्चों को डेटा सुरक्षा कानूनों के तहत नाबालिग माना जाता है और उनके लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है, लेकिन सोशल मीडिया एक्सेस पर कोई सख्त उम्र प्रतिबंध नहीं है। हालिया संकेतों के अनुसार, गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर विचार कर रहे हैं। गोवा सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध की संभावना तलाशने के संकेत दिए हैं।

टेक कंपनियों की चुप्पी
आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिशों पर फिलहाल मेटा, अल्फाबेट और X जैसी टेक कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यदि सरकार इन्हें कानून का रूप देती है, तो भारत में इन कंपनियों के कामकाज के तरीके में बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं।

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