बंगाल में UCC की दस्तक! चुनावी वादा पूरा करने की तैयारी, क्या असम मॉडल पर चलेगी शुभेंदु सरकार?

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य की भाजपा सरकार विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान सोमवार को UCC विधेयक पेश कर सकती है। इसे विधानसभा चुनाव से पहले किए गए प्रमुख वादों में से एक माना जा रहा था और सरकार अब उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी है। यदि यह विधेयक सदन में पेश होता है तो पश्चिम बंगाल उन राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है जिन्होंने समान नागरिक संहिता को लागू करने या उसे कानूनी रूप देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

चुनावी वादे को समय से पहले पूरा करने की तैयारी

विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सत्ता में आने के छह महीने के भीतर UCC लागू करने का वादा किया था। पार्टी के संकल्प पत्र में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया गया था। सरकार के मौजूदा कदम को उसी वादे को अमल में लाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि प्रस्तावित कानून तैयार करने में असम के मॉडल से प्रेरणा ली जा सकती है, हालांकि सरकार अपने राज्य की परिस्थितियों के अनुसार कुछ अलग प्रावधान भी जोड़ सकती है।

क्या होगा UCC का दायरा?

प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना बताया जा रहा है। इसके तहत धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू करने की अवधारणा पर जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट बनेगी।

भाजपा का दावा- समान कानून से बढ़ेगी बराबरी

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेतृत्व लगातार UCC के पक्ष में तर्क देता रहा था। पार्टी का कहना है कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करेगा और समान अधिकारों की अवधारणा को आगे बढ़ाएगा।

भाजपा नेताओं का दावा है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि व्यक्तिगत कानून धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक पहचान से जुड़े विषय हैं। ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।

विपक्ष का आरोप है कि इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, जबकि सरकार का कहना है कि यह शासन सुधार से जुड़ा विषय है।

दो और सख्त कानून भी ला सकती है सरकार

सूत्रों के मुताबिक UCC के अलावा सरकार सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े दो अन्य विधेयक भी सदन में पेश कर सकती है। इनमें सार्वजनिक अव्यवस्था, हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी कर्मचारियों या पुलिसकर्मियों पर हमलों से जुड़े मामलों के लिए सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए जा सकते हैं।

इन प्रस्तावों में मौजूदा सार्वजनिक व्यवस्था कानून में संशोधन के साथ-साथ असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए नया कानून लाने की तैयारी भी शामिल बताई जा रही है।

कानून व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने वाली घटनाओं को देखते हुए नए कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता महसूस की गई है। प्रस्तावित कानूनों में कई अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखने पर भी विचार किया जा रहा है।

 

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